डगमगाते हॉर्मोन्स और डाइट

डगमगाते हॉर्मोन्स और डाइट Dagmagate Harmons Aur diet woman health tips in hindi

 

में आपको ये बताने जा रहा हु की की तरह आप आपने बेकार हार्मोन्स को फिर से तरोताज़ा कर सकते है. स्त्री मन की ही तरह स्त्री भी एक पहेली है. इसे सुलझाने में मदद करते है फीमेल हार्मोन्स. इनका संतुलित रहना जरूरी है.

मेनोपोज़ और प्रिमेस्तुअल मुद सेविंग्स, हर महिला इनसे गुजरती है. यह बात और है की किसी के लिए यह कम तकलीफदेह और किसी के लिए ज्यादा होता है. फीमेल हार्मोन इस्ट्रोजन स्त्री शरीर में ४०० से ज्यादा जिम्मेदारियां निभाता है और उन्हें सुवस्थ रखता है. इस पर विश्वभर में तरह-तरह की रिसर्च की जा रही है. यह हार्मोन महिलाओ के पीरियड्स को नियंत्रित करता है और यूट्रस को प्रेगनेंसी के लिए भी तैयार करता है.

द सुपरचार्जड हार्मोन डाइट की लेखिका “डॉ. नताशा टर्नर” ने अपनी इस बुक में एस्ट्रोजन के बढ़े स्तर के कारण होनेवाली समस्याओ पर प्रकाश डाला है. ओनका कहना हो, “शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाने की स्थिति को स्ट्रोजन डोमिनेंस कह जाता है. इसके कारण वज़न बढ़ना, शारीर में ख़राब फैट का जमा होना, वाटर रिटेशन, ब्लोटिंग के साथ और भी कई बीमारिया हो सकती है. सिर्फ महिलाये ही नहीं, बल्कि पुरुष भी एस्ट्रोजन के बढ़ने से मोटापे के शिकार होते है.”

सिर्फ एस्ट्रोजन का बढ़ना ही आपको तंग करता हो, यह जरूरी नहीं है. शरीर में इसका स्तर कम होने से महिलाओ को मेनोपोज़ जैसे लक्षण यानि हॉट फ्लेशेज़, मुद स्विंग, मेमोरी लॉस, गुड़ कोलोस्ट्रोल में कमी, कमज़ोर नज़र की समस्या हो सकती है.

एस्ट्रोजन का स्तर आपकी हेल्थ पर असर डालता है और आप जो भी कहती है, उसका सीधा असर आपको हॉर्मोन्स के लेवल पर पड़ता है. इसलिए इन हार्मोन्स को डगमगाने से बचाने के लिए अपनी डाइट पर ध्यान देना बहुत जरूरी है.

“डॉ. नताशा टर्नर” का कहना है, “शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्वास्थ्य स्त्राव के लिए डाइट में ज़िंक, मेग्नेशियम, विटामिन बी १२ और अन्य जरूरी पोषक तत्वो लेने बेहद जरूरी है. इनके सही संतुलन से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन एस्ट्रोजन में तब्दील होता है. अपनी डाइट में सभी पोषक तत्वो से भरपूर बैलेंस्ड डाइट को शामिल केरे. इससे लिवर में जमा हुए विषैले रसायन और तत्व बहार निकलने में भी मदद मिलती है.”

वही अमेरिका के फ्लोरिडा की वैलनेस एक्सपर्ट डॉ. कार्मेला सिबेस्टियन एस्ट्रोजन के साथ फीटोएस्ट्रोज़न का स्तर संतुलित बनाये रखने पर भी ज़ोर देती है. ये शरीर में मौजूद कंपाउंड्स होते है, जो एस्ट्रोजन की ही तरह होते है और कुदरती चीज़ों से प्राप्त होते है. फ़यटोएस्ट्रोज़न सोया, अलसी, ब्रोकली, पत्तागोभी, मूली और हरी पत्तेदार सब्जियों से प्ऱप्त होते है. अगर शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बेहद बढ़ा हुआ है, तो यह जरूरी नहीं की आप इन सब चीज़ों पर लगाम लगाए.

अगर आपकी ब्लड शुगर कण्ट्रोल में रहेगी, तो एस्ट्रोजन भी नहीं डगमगाएगा. ब्लड शुगर के स्तर में कमी आने से शरीर इन्सुलिन के प्रीटी जिस प्रकार की प्रितिक्रिया देने लगता है, उससे स्ट्रोम हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर भी बढ़ता है. नतीजा स|रे हार्मोन डगमगाने लगते है. दरअसल, आपके शारीर के वे सारी क्रियाए, जिन पर हार्मोन्स असर डालते है, एक थेरमोसट्रेट की तरह काम करते है. एक के स्तर कम या ज्यादा होने से सभी हार्मोन प्रभावित होने लगता है. इसका सीधा-सादा हल एहि है की ऐसे डाइट ली जाये, जिससे शरीर में किसी एक हार्मोन का स्तर कम या ज्यादा न हो.

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डुप्लीकेट एस्ट्रोजंस

एस्ट्रोजंस की ही तरह काम करते है जिनोएसट्रोजंस, जो शरीर में इस हार्मोन का स्तर बढ़ाते है. ये केमिकल्स मीट और दूध में आर्टिफीसियल रूप से इंजेक्ट किये ग्रोथ हार्मोन में पाए जाते है. सब्जियों, फ्लो व् दोनों अदि में मौजूद पेस्टिसाइड्स, हेर्बिसाइड्स और इंसेक्टिसाइड्स में भी ये केमिकल्स पाय जाते है. शरीर इनकी बेहद थोड़ी मात्रा ही अब्जोर्ज़ करने में सक्षम है. इसलिए डिब्बाबंद खाद पदार्थो की जगहे ऑर्गेनिक और प्रोसेड्स फ़ूड की जगहे फ्रेश फ़ूड को डाइट में शामिल केरे.

हार्मोन्स के असंतुलित के कारण होनेवाली आम बीमारिया इस प्रकार है-

1. एस्ट्रोजन की अधिकता :- नींद के पैटर्न में बदलाव, वज़न बढ़ना, भूक बढ़ना, तनाव की अधिकता, मेटाबोलिज़्म का धीमा होना, पीसीओडी, इनफर्टिलिटी, डाबिटीज़ का रिस्क, बालो की असामान्य ग्रोथ.

2. एस्ट्रोजन की कमी :- सेक्स इच्छा में कमी आना, पीरियड्स की अनियम्त, मूड स्विंग, प्रेगनेंसी संबंधी समस्या.

3. थायरॉयड :- मेटाबोलिज़म में कमी, वज़न बढ़ना या कम होना, थकान, एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन.

4. टेस्टोएस्टेरॉन की कमी :- वज़न बढ़ना, मासपेशियो का कमज़ोर होना, नींद में कमी, हार्ट की धड़कन का अनियंत्रित होना, साँस फूलना, थकान.

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