मोलई पेंग वन मैन इंडिया कहानी

मोलई पेंग वन मैन इंडिया कहानी Molai Peng One Man India Kahani moral story of hindi

 

ये बात तक़रीबन दो से तीन दशक पुरानी है. मोलई पेंग “मशिंग” नमक जनजाति के थे , जो की भारत मै पायी जाती है.वो जंगल मैन अपने पारी वॉर के साथ रहते थे, जिसमे उनकी पत्नी और तीन बच्चे थे. पेंग की इनकम का स्रोत मात्र भेस का दूध बचना ही था, इसी से ये अपनी आजीविका चलते थे. साथ ही ये खेतो मै मवेशियों को भी घूमते थे.

पेंग साथ ही एक मजदुर भी थे, इन्होने लगभग पांच साल की लम्बी परियोजना मै भी काम किया था. ज्यादातर लोगो ने काम छोड़ दिया था , लेकिन फिर भी इसके बावजूद पेंग ने लगातार इस परियोजना मै काम किया. पेंग ने पेड़ – पोधो की देख रेख भी की और साथ ही खुद भी ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए. और इन पोधो को इन्होने ज्यादा से ज्यादा जंगल मै बदलने का काम किया. ऐसा इन्होने क्यों किया अब ये हम आपको बताते है.


जैसा की हमने बताया की लगभग दो से तीन दशक पहले पेड़ो की समस्या के कारण काफी मात्रा मै सांपो की मौत हो चुकी थी. इसलिए इन्होने ये सब देख कर दोबारा से जंगल को बनाने का फैसला किया. जहा पर पेड़ो की कमी हो चुकी थी , आज वह पर लगभग 1350 एकड़ जंगल बस चूका है, जो की जादव मोलई पेंग वन कहा जाता है. क्योकि पेंग ने इसे खुद ही बनाया है.

पेंग द्वारा बनाया गया ये जंगल जानवरो के रहने के लायक है, जैसे की बाघ, गेंडे , हिरन और खरगोश और भी कई सारी प्रजातिया मिलती है इस जंगल मै. इसके अंदर बांस के भी कई हज़ारो पेड़ लगाए गए है. यहाँ पर हर साल लगभग 150 हाथियों का झुंड आता है इस जंगल मै.


वो लगभग 15 साल के थे , जब उनके सामने ही कई बढ़ो ने असम को खत्म सा ही कर दिया था. उन्होंने ये देखा की कई पक्षी उनके घर के पास झीलों मै गिर रहे थे. ये सब देख कर पेंग बड़े ही परेशान थे.

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पेंग कहते है की जब मैंने अपने से बड़ो से पूछा की ” अगर हम भी इन सभी सांपो और सभी जानवरो की तरह एक दिन मर जायेगे , तो क्या होगा?” मेरी इस बात पर सब लोग हंस रहे थे. लेकिन मेरे मन मै तो बस यही चल रहा था की मुझे एक दिन इस देश को एक हरियाली वाला देश बनाना है. क्योकि मै जनता हु की जब जंगल काट जाते है तो कई जानवरो का घर भी खत्म हो जाता है. जिससे वो बेघर हो जाते है.


तभी पेंग ने सोचा की क्यों न मुझे जंगल विभाग से संपर्क करना चाहिए , क्योकि वो ही इस समस्या का समाधान कर सकते है. उन्होंने कहा की आपको ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए. यही इस समस्या का समाधान कर सकती है. क्योकि भृमपुत्र नदी भी नजदीक ही थी. तो हम अब पौधा रोपण करने लग गए थे. पेंग ने अपना सम्पूर्ण ही जीवन जंगल बनाने मै समर्पित कर दिया था. पेंग को सन २०१२ मै जवाहर लाल यूनिवर्सिटी से पर्यावरण विज्ञानं विद्यालय से भी उपाधि प्राप्त हो चुकी है.

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