अंगमर्दक चिकित्सा के पांच नियम से उपाय

अंगमर्दक चिकित्सा के पांच नियम से उपाय Means of five rules of angina therapy, health tips in hindi

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के आप सभी नियमो का पालन करते है , तो आप अपने आप को स्वास्थ्य और बीमारी युक्त बना सकते है. साथ ही इससे आपकी उम्र भी लम्बी होती है. इसलिए हमे ये उपाय करने बहुत ही जरूरी होती है.

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के पांच नियम

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  1. समुचित नींद लेना

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अर्न्तगत प्रतिदिन व्यक्ति को 8 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है. शरीर की थकान को मिटाने के लिए भी नींद लेना बहुत जरूरी है. जितना नींद लेने से शरीर की थकान को मिटाया जा सकता है, उतना किसी और चिकित्सा प्रणाली और न किसी दवा से मिटाया जा सकता है. नींद की अवस्था में शरीर के सभी अंग तथा मस्तिष्क के स्नायु आराम की स्थिति में होते हैं और स्नायु भी शिथिल की अवस्था मे होते हैं जिसके कारण शरीर की थकान मिट जाती है तथा मन तरोताजा हो जाता है. वैसे तो नींद लेने के बहुत तरीके है लेकिन नींद लेने का आदर्श तरीका यह है कि लेटते ही गहरी नींद आ जाए और तब तक नींद की अवस्था में रहें जब तक कि अपने आप नींद न खुले.

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सभी व्यक्तियों को प्रतिदिन नींद लेते समय सपने आते हैं तथा सपनों के लिए हल्की नींद जरूरी होती है जो कि गहरी नींद की तुलना में लाभकारी नहीं होती है. ठीक इसी प्रकार नशे के कारण आने वाली नींद आदर्श नींद नहीं होती हैं क्योंकि इस प्रकार की नींद गहरी नींद नहीं होती है. रात के समय में जल्दी सो जाना चाहिए तथा सूरज निकलने से पहले जाग जाना चाहिए और सुबह के समय में उठकर शुद्ध हवा का लाभ उठाना चाहिए. इस जीवन में यह जरूरी है कि शुद्ध हवा में सांस ली जाए तथा गहरी नींद में सोया जाए तथा आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से नियमित रूप से उपचार किया जाए तो जिन्दगी लम्बी और स्वस्थ हो सकती है.

  1. उचित मात्रा मे खुराक

अपने इस जीवन में खाने की खुराक समुचित होना बहुत जरूरी होता है. भोजन कितना भी पौष्टिक क्यों न हो फिर भी उसे भूख से अधिक नहीं खाना चाहिए. जो भोजन मनुष्य खाने में इस्तेमाल कर रहा है उसमें उचित मात्रा में प्रोटीन, वसा तथा कार्बोहाइड्रेट होने चाहिए ताकि सक्रिय जीवन जिया जा सके तथा इसके अलावा भोजन में खनिज, जल तथा विभिन्न प्रकार के विटामिन भी होने चाहिए. जिससे भोजन पाचने की क्रिया में विघटन हो सके और उसे ऊर्जा में बदला जा सके.

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भोजन कितना ही संतुलित क्यों न हो उसके साथ यह भी आवश्यक है कि आप जिस पदार्थ को ग्रहण कर रहे हैं शरीर उसे अच्छी तरह से पचा सके. इसलिए यह जरूरी है कि भोजन नियमित समय पर पर्याप्त मात्रा में किया जा सके तथा भोजन जब भी खा रहे हो उसे अच्छी तरह से चबाएं. जब आप नाश्ता कर रहे हो उस समय यह ध्यान देना जरूरी है कि नाश्ता हमेशा पौष्टिक होना चाहिए. भावनात्मक तनाव का प्रभाव पाचनसंस्थान पर पड़ता है. इसलिए यह जरूरी है कि व्यक्ति को चिंता, फिक्र तथा क्रोध नहीं करना चाहिए तथा शांत और सुखद वातावरण में भोजन खाना चाहिए.

यदि पाचनतंत्र से सम्बन्धित कोई रोग हो जाए तो उस रोग का इलाज तुरन्त कराना चाहिए तथा इन रोगों का इलाज आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से किया जा सकता है. इस चिकित्सा से उपचार करने पर पाचन व पोषक तत्वों का भली प्रकार से शोषण होता है जिसके फलस्वरूप खाया-पिया भोजन शरीर में लगने लगता है और स्वास्थ्य में सुधार हो जाता है.

  1. व्यायाम

अच्छे स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना बहुत जरूरी है. शरीर को उचित व्यायाम न मिल पाने के कारण व्यक्ति की मांसपेशियों की शक्ति क्षीण हो जाती है. इस शक्ति को बनाये रखने के लिए व्यायाम करना बहुत ही आवश्यक होता है. आज के समय में इसलिए ही जोगिंग का प्रचलन बढ़ गया है. लेकिन इसके अलावा भी रोज प्रतिदिन पैदल चलने से तथा प्रतिदिन के कार्यो में शरीर को जितना सम्भव हो उतना हिलाने-डुलाने मात्र से अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं. पैदल चलने से पैरों की रक्त वाहिनियों में समुचित प्रवाह होता है और निष्क्रियता के कारण उत्पन्न सुस्ती दूर हो जाती है. आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार हाथों तथा उंगलियों की कसरत पर बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए. छोटे बच्चे जो शरीर के इन भागों का व्यायाम नहीं करते हैं.

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वे अधिकतर परावर्तित क्रियाओं को विकसित करने में असफल रहते हैं जिसके कारण वह गिरते रहते है और चोट ग्रस्त हो जाते है. हाथ तथा उंगलियों की कसरत करने से प्रेरक तन्त्रिकाएं विकसित हो जाती हैं. जो आत्म रक्षा के लिए हाथ और भुजाओं की परावर्तित क्रियाएं को तेज कर देती हैं. आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के द्वारा आंखों तथा दान्तों को मजबूत बनाने के लिए उचित व्यायाम करना चाहिए. यह बहुत ही लाभदायक है क्योंकि इस प्रकार के व्यायाम से हाथ व उंगलियों का अभ्यास मस्तिष्क के क्रिया-कलापों से जुड़ा रहता है.

  1. मल त्याग

वैसे देखा जाए तो दिन में एक बार मलत्याग करना बहुत जरूरी है. मलत्याग सम्बन्धी नियमों का प्रतिदिन पालन करना चाहिए. इन नियमों के सही तरीके से पालन करने पर पाचनतंत्र प्रणाली सही तरीके से कार्य करती है तथा पोषक तत्व सोख लिए जाते हैं.

  1. हंसी

मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए हंसना बहुत जरूरी है. हंसता हुआ चेहरा सुखद सा लगता है तथा सुन्दर भी लगता है जो व्यक्ति हंसता रहता है उसका शरीर स्वस्थ रहता है. हंसी के द्वारा खून के रंग में भी सुधार हो जाता है. हंसी के विपरीत जो व्यक्ति क्रोध करता है तथा भय से डरा हुआ होता है उसका चेहरा काला सा पड़ जाता है और आंतरिक अंगों में विकृतिजन्य तनाव उत्पन्न करता है. हंसी के कारण डायाफ्राम की ऊपर-नीचे गति हृदय की क्रिया को तेज कर देती है. जिसके परिणामस्वरूप रक्तप्रणाली में सुधार होता है और शरीर के कई रोग अपने आप ठीक हो जाते हैं. हंसी के द्वारा आमाशय तथा आन्तो की क्रिया में तेजी आती है जिसके फलस्वरूप पाचनप्रणाली में सुधार होता है और शरीर स्वस्थ बना रहता है. हंसी के द्वारा अन्त:स्रावी प्रणाली के आंतरिक स्रावों को भी गति मिल जाती है जिसके कारण शरीर के अनेक रोग ठीक हो जाते हैं.

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