आकाश चिकित्सा की जानकारी

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आपने बहुत सी चिकित्साओ के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी आकाश चिकित्सा के बारे में सुना है. आकाश चिकित्सा इंसान को बहुत फायदा पहुँचाता है. क्योकि आकाश पर भगवानो का वास होता है, इसलिए ये चिकित्सा सबमे सर्वोत्तम मानी गयी है. जल, पृथ्वी, वायु, आकाश, अग्नि पांचों तत्वों में सबसे पहला और लाभकारी तत्व आकाश तत्व होता है. इस तत्व को शून्य भी कहा जाता है. जिस तरह से भगवान निराकार लेकिन बिल्कुल सच है उसी तरह से आकाश तत्व भी निराकार लेकिन सच है. आकाश तत्व का कभी भी नाश नहीं हो सकता. आकाश तत्व विशुद्ध तथा निर्विकार होता है.

इसलिए उससे हमें विशुद्धता और निर्मलता की प्राप्ति होती है. आकाश में देवताओं का वास माना जाता है जो अमर होते हैं. हम भी आकाश तत्व का भरपूर और सही मात्रा में सेवन करके अमर तो नहीं लेकिन निरोगी और लंबी उम्र तक तो जी सकते हैं. जो ताकत हमें आकाश तत्व से मिलती है, वह बहुत ज्यादा लाभकारी होती है. आकाश तत्व आत्मिक, मानसिक और शारीरिक तीनों तरह के स्वास्थ्य को अच्छा बनाने वाली होती है. यह सच है कि अगर आकाश तत्व का जन्म न हुआ होता तो न तो हम सांस ही ले सकते और न ही हमारी स्थिति और अस्तित्व ही होता. शेष चारों तत्वों का आधार भी आकाश तत्व होता है.

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आकाश ब्रह्माण्ड का आधार भी होता है. इस तत्व को प्राप्त करने का एक प्रबल साधन उपवास है. वैसे भी रोजाना भूख से थोड़ा सा कम खाकर हम इस कीमती और उपकारी तत्व को पाकर सुख शांति के भागी बन सकते हैं. किसी रोग से घिर जाने पर उपवास करके शरीर की जीवनीशक्ति के कामों को बंद करवाकर हम अपने शरीर में आकाश तत्व की कमी को पूरा कर सकते हैं जिसके नतीजतन हम खुद ही स्वस्थ हो जाते हैं. शोक, काम, गुस्सा, मोह और डर आकाश तत्व के ही काम हैं. शरीर के अन्दर आकाश तत्व के खास स्थान सिर, गला, दिल, पेट और कमर है. दिमाग में मौजूद आकाश, वायु का वह भाग है जो प्राण का मुख्य स्थान है. हृदय देशगत तेज का भाग है जो पित्त का मुख्य स्थान है. इससे अन्न हजम हो जाता है.

पेट देशगत आकाश जल का भाग है, इससे हर तरह के मल को बाहर निकालने की क्रिया सम्भव होती है. कटि देशगत आकाश पृथ्वी का भाग है यह ज्यादा स्थूल होता है और गंध का आश्रय है. किसी महान विद्वान ने कहा है कि आकाश तत्व आरोग्य सम्राट है. उनके मुताबिक आकाश का राज जानना भगवान का राज जानने के समान है. ऐसे महान तत्व का जितना ही अभ्यास और इस्तेमाल किया जाएगा, उतना ही ज्यादा आरोग्य मिलेगा. जिस तरह से आकाश हमारे आसपास, ऊपर और नीचे है इसी तरह से वह हमारे अन्दर भी है. चमड़ी के 1-1 छेदों में तथा 2 छेदों के बीच में जहां जगह है वहां आकाश तत्व होता है.

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इस आकाश तत्व की खाली जगह को हमें भरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. अगर हम अपना रोजाना करने वाला भोजन जितनी शरीर को जरूरत है उतना ही लें और ज्यादा न खाएं तो शरीर में खाली जगह रहेगी. इसलिए अगर सप्ताह में एक बार उपवास कर लिया जाए तो सब घट-बढ़ सकती है. अगर पूरे दिन उपवास करना सम्भव न हो तो दिन में एक बार का भोजन न करने से भी लाभ होता है.

मैथुन के प्रकार Methun ke parkar

  1. मानसिक मैथुन Manshik Methun
  2. किसी स्त्री के शरीर अथवा हाव-भाव आदि को मन में याद करना.
  3. गलत तरह के पुरुषों की गलत क्रियाओं को याद करना.
  4. अपने द्वारा पहले के समय में की गई सैक्स आदि क्रियाओं के बारे में सोचना.
  5. आने वाले समय में किसी स्त्री के साथ सैक्स करने के बारे में सोचना.
  6. किसी स्त्री के गंदे चित्रों को देखकर मन में अश्लील बातें आना.
  7. केलि मैथुन Keli Methun
  8. स्त्रियों के साथ हंसी-मजाक करना या नाचना गाना.
  9. मजे लेने के लिए क्लबों, बार आदि में जाना.
  10. स्त्रियों के साथ गंदी हरकतें करना.
  11. कीर्तन मैथुन Kirtan Methun
  12. अश्लील बातें करना.
  13. स्त्रियों के रूप-रंग, यौवन आदि का वर्णन करना.
  14. सैक्स के बारे में बातें करना.
  15. गंदे गाने गाना, गंदी किताबें पढ़ना आदि.
  16. प्रेक्षण मैथुन Prekshan Methun
  17. स्त्रियों के शरीर के अंगों को देखना.
  18. किसी सुंदर स्त्री के चित्र को देखना, श्रंगार रस के नाटक, सिनेमा आदि देखना.
  19. उत्तेजक वस्तुओं तथा सजावट के सामान को देखना.
  20. श्रृंगार मैथुन Srangar Methun

खुद को सुन्दर दिखाने के लिए बालों को बनाना, बालों में कंघी करना, अच्छे-अच्छे कपड़े पहनना, परफ्यूम आदि लगाना, फूलों की माला पहनना, आंखों में सुरमा लगाना, दांतों में सोना लगवाना, होंठों को लाल करने के लिए लिपिस्टिक लगाना ये सभी श्रृंगार मैथुन के अंर्तगत आते हैं.

  1. गुह्नयभाषण मैथुन Guhanybhasan Methun

किसी शांत सी जगह पर स्त्री को ले जाकर गंदी-गंदी बातें करना, उनकी खूबसूरती, जवानी और शरीर की तारीफ करना, हंसी-मजाक करना आदि सब गुह्नयभाषण मैथुन में आते हैं.

  1. स्पर्श मैथुन Sparsh Methun

कामवासना की दृष्टि से किसी स्त्री को छूना, चुम्बन करना, स्त्री के नाजुक अंगों को छूना, स्त्री के साथ संभोग करना आदि स्पर्श मैथुन में आते हैं.

  1. रूप मैथुन Roop Methun

स्त्रियों को गंदी तथा यौन उत्तेजना बढ़ाने वाले किस्से सुनाना, स्त्री के रूप, खूबसूरती और अंगों के बारे में बातें सुनना आदि रूप मैथुन के अंतर्गत आते हैं.

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वीर्य और रज Sperm aur raj

जिस तरह से दूध के अन्दर मक्खन, तिल या सरसों के अन्दर तेल, मीठी चीजों में मिठास और फूलों में खुशबू रहती है उसी तरह से पुरुषों के शरीर में वीर्य और स्त्री के शरीर में रज: मौजूद रहता है. पुराने ग्रंथों में यह लिखा गया है कि यदि भोजन की मात्रा 40 किलो हो तो उससे 1 लीटर खून बनेगा और 1 लीटर खून से सिर्फ 20 मिलीलीटर वीर्य बनता है. अगर कोई भी स्वस्थ आदमी रोजाना 1 किलो भोजन खाए तो इस हिसाब से वह 40 दिनों में 40 किलो भोजन करेगा. इसका मतलब यह है कि सिर्फ 20 मिलीलीटर वीर्य को बनने में 40 दिन लग जाते हैं.

इस प्रकार यदि शरीर से 20 मिलीलीटर वीर्य निकलता है तो तो इसका तात्पर्य यह हुआ कि शरीर से 1 लीटर खून निकल गया. लेकिन आज के शरीर विज्ञानी इस सच नहीं मानते. शास्त्रों के मुताबिक 1 बार का वीर्य निकलने से किसी भी मनुष्य की उम्र 1 महीने के करीब कम हो जाती है. अब सोचने वाली बात तो यह है कि थोड़ी देर के मजे के लिए अपने वीर्य को बर्बाद करना कितनी बड़ी बेवकूफी सिद्ध होती है.

वीर्य और रज की 2 गतियां

  1. ऊर्ध्वगति

जब वीर्य और रज: पैदा होकर शरीर में खून के जरिये ऊर्ध्व हो जाए तो उसे ऊर्ध्वगति कहते हैं.

  1. अधोगति

रज: या वीर्य का निकल जाना उसकी अधोगति कहलाता है.

जानकारी Jankari

जब शरीर के अन्दर रज: और वीर्य बन जाता है और उन्हें नष्ट नहीं किया जाता तो वह शरीर में मौजूद खून में मिलकर ओज में बदल जाता है और पूरे शरीर में फैल जाता है जिसके नतीजतन पुरुष के अन्दर मर्दानगी के सारे लक्षण और स्त्रियों में यौवन के सारे लक्षण प्रकट होकर उनमें तेज, चमक, ताकत की बढ़ोत्तरी होती है.

हम ये बिलकुल भी नहीं चाहेंगे की आपको किसी भी तरह की कोई भी परेशानी हो, इसलिए हम आपको सदा ही ऐसे घरेलु उचार देना चाहेंगे , जो की आपको अत्यधिक लाभ दे. ताकि आप एलोपेथी दवाईयों का इस्तेमाल कम से कम करे. क्योकि एलोपेथी दवाईयां हमारी बीमारी को तो ठीक कर देती है लेकिन ये हमारे शरीर को काफी मात्रा मैं नुकसान भी पहुँचती है. इसलिए हमे इन दवाइयों को ज्यादा से ज्यादा अवाइएड करना चाहिए यानि की कम से कम ही इन्हे खाना चाहिए.

तो दोस्तों आपको हमारे द्वारा बताती गयी जानकारी किसी लगी हमे जरूर बताये. ताकि हम आपको अधिक से अधिक जानकारिया उपलब्ध कराये. ये जो उपचार हमने आपको बताये है, ये आपके लिए काफी फायदेमंद है, लेकिन हम आपसे ये अनुरोध करते है की जो कुछ भी जानकारी हमने आपको दी है. उसे अपनी लाइफ मैं इस्तेमाल करने से पहले कम से कम एक बार हम ये चाहेंगे की आप अपने डॉक्टर की सलहा जरूर ले.

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