आत्मविश्वास बढ़ाने के 18 तरीके

आत्मविश्वास बढ़ाने के 18 तरीके

Aatmviswas badhane ke 18 terike

aatmvishwas badhane ke tarike , आत्मविश्वास हमारे जीवन में बहुत महत्त्व रखता है. क्योकि यदि आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी होगी तो आप कभी भी एक सफल इंसान नहीं बन सकते है. इसलिए हमे सदा ही अपने आत्मविश्वास को बढ़ने का प्रयास करना चाहिए.

आत्मविश्वास बढ़ाने के उपाय Aatmviswas badhane ke upay

1. पब्लिक में बोलना शुरू करे

लोगों के सामने खड़े होने और बोलने के पहले लगभग हर किसी का थोड़ा व्यग्र हो जाना बहुत सामान्य है. उम्मीद करते हैं, कि आप अपनी स्पीच के साथ तैयार हैं और जानते हैं कि इसे कैसे देना है. भाग्यवश इन घबराहटों को सँभालने के कुछ तरीकें हैं जिन्हे ज्यादा बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है. खड़े होकर बोलने के पहले, अपने हांथों को कई बार भींचें ताकि आपकी एड्रेनालाईन (adrenaline) में होने वाली हलचल को संभाल सकें.

3 गहरी, बड़ी साँसें लें. यह आपके सिस्टम को साफ़ करेगा और आपको स्पीच के दौरान सामान्य सांस लेने के लिए तैयार करेगा. आत्मविश्वास के साथ आराम से और सीधे खड़े रहे और अपने पैर कन्धों की चौड़ाई जितने खुले रखें. यह आपके दिमाग को आत्मविश्वासी महसूस करवाएगा और स्पीच देना आसान भी बनाएगा.

2. अपने श्रोताओं को देख कर मुस्कुराइए

जब में कमरे में आएं तो उनकी तरफ देख कर मुस्कुराये (अगर आप वहां हों) या जब आप उनके सामने उठ के खड़े हों तब मुस्कुराएं. इससे यह प्रतीत होगा कि आप कॉंफिडेंट हैं और आपके और उनके दोनों के लिए ही वातावरण हल्का हो जायेगा. तब भी मुस्कुराएं जब आपको लग रहा हो कि आप प्रक्षेपण कर रहें हैं (विशेषतः जब आपको प्रतीत हो कि आप प्रक्षेपण कर रहें हैं. इससे आपका दिमाग आराम और आत्मविश्वास की अनुभूति करेगा.

3. अपनी अच्छी परफॉरमेंस दें

किसी भी प्रकार की, पब्लिक के बीच बोलने में, सब कुछ परफॉरमेंस ही है. आप कैसा परफॉरमेंस देते हैं उसी के हिसाब से आप अपनी स्पीच को बोरिंग या मजेदार बना सकते हैं. जब आप बोल रहें हों तो आपमें ओनस्टेज छवि की जरूरत होती है. एक कहानी सुनाए. स्पीच देना या ऐसे बोलना जैसे आप एक कहानी सुना रहें हो आपके परफॉरमेंस का एक हिस्सा है. लोग कहानी सुनना पसंद करते हैं और यह उनके लिए आपसे जुड़ना आसान बना देगा, भले ही आप किसी ऐसी चीज पर बोल रहे हों जो तथ्यों पर आधारित हो. अपने प्रमुख थीम या विषय को इस कहानी का आधार बनाए. श्रोता आपके टॉपिक की परवाह क्यों करें? क्या कारण है? आपने स्पीच का जो रिहर्सल किया और तात्कालिकता में संतुलन बैठाने का प्रयास करें.

लोग वहां बैठकर आपको अपने कार्ड्स में से देख कर पढ़ते हुए नहीं देखना चाहते. अपने विषय को विस्तार देने के लिए अपने लिखे हुए कार्ड्स के अतिरिक्त भी कुछ जगह छोड़े और रूचि बढ़ाने के लिए कुछ और कहानियां सुनाएं. अपनी बात को रखने के लिए अपने हाथों का उपयोग करें. आप अपनी स्टेज पर बहुत ज्यादा हिलना डुलना नहीं चाहते, पर आप बात करते हुए एक ही मुद्रा में खड़े रहना भी नहीं चाहते. अपनी बात रखने के लिए नियंत्रित भाव भंगिमाओं का उपयोग करना अच्छा रहता है. बोलते हुए अपनी आवाज में परिवर्तन लाएं. अगर आप लम्बे समय तक एक ही टोन में बोलते रहे तो लोग 10 सेकंड में सो जाएंगे. अपने विषय के बारें में उत्तेजित हों और उसकी अभिव्यक्ति अपने बदलावों से करें.

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4. अपने श्रोताओं को एंगेज करें

आप सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपके श्रोता आपके बस में हैं, इसका अर्थ है उन्हें किसी मटेरियल में एंगेज या उलझाना चाहे वो कुछ भी हो. इसका अर्थ है दिलचस्प टॉपिक से ज्यादा दिलचस्प वक्ता होना है. श्रोताओं की ओर देखें. मानसिक रूप से कमरे को भागों में बाँट लें और बारी बारी से हर सेक्शन के एक श्रोता से नजर मिलाएं. बोलते हुए अपने श्रोताओं से सवाल करें. अपनी स्पीच के हर हिस्से को खोलते हुए जानकारी देने के पूर्व श्रोताओं से ऐसे प्रश्न करें जिनका उत्तर आप उनसे चाहते हैं. इससे उन्हें महसूस होगा कि वे भी आपकी स्पीच का हिस्सा हैं.

5. हमेशा धीरे धीरे बोलना चाहिए

जनता के बीच में बोलते हुए बहुत से लोग सबसे ज्यादा जो गलती करते हैं वो है ज्यादा तेजी से बात करना. आपकी सामान्य बातचीत की रफ़्तार स्पीच में उपयोग की जाने वाली आवाज से बहुत तेज होती है. अगर आपको लग रहा है कि आप बहुत धीमे चल रहे हैं, संभवतः आप बिल्कुल सही जा रहे हैं. अपनी स्पीच के दौरान पानी पिएँ. इससे आपके श्रोताओं को समझने का थोड़ा समय मिलेगा और आपको भी धीमा होने के लिए थोड़ा समय मिलेगा. अगर आपका कोई दोस्त या परिवार का सदस्य श्रोताओं में है तो उनके साथ एक सिग्नल सेट कर ले ताकि वो आपको बता सकें की आप बहुत तेज बोल रहें हैं. अपनी पूरी स्पीच के दौरान कभी कभी उनकी ओर देखते रहें ताकि आप जान सके कि आप ठीक जा रहे हैं.

6. स्पीच का अंत सदा ही अच्छा रखना चाहिए

लोगो को स्पीच की शुरुवात और अंत याद रहता है, उन्हें बीच के हिस्से यदाकदा ही याद रहते हैं. इस कारण से आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि आपकी स्पीच का अंत ऐसा हो जिसे वो याद रखेंगे. सुनिश्चित करें कि आपके श्रोताओं को पता हो कि यह विषय महत्वपूर्ण हो और उनके पास यह जानकारी क्यों होनी चाहिए. अगर आप कर सकें, तो एक कॉल फॉर एक्शन (call for action) से समाप्ति करें. उदाहरण के लिए, अगर आप स्कूल में आर्ट क्लासेज के महत्व के बारे में स्पीच दे रहें हैं.

तो अपने श्रोताओं को आर्ट एलेक्टिव्स को हटाए जानें के तथ्य पर वो क्या कर सकते है करने का काम दें. एक ऐसी कहानी के साथ अंत करें जो आपके मैन पॉइंट्स को समझाती हो. लोग कहानी सुनना पसंद करते हैं. इस कहानी को ऐसा मोड़ दे कि कैसे इस जानकारी से किसी को फायदा हुआ, इस जानकारी ना होने के खतरे, या कैसे यह आपके श्रोताओं से विशिष्ट रूप से सम्बद्ध है. (लोग उन चीजों में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं जो उनके बारे में होती हैं).

7. किस विषय पर बोलना है ये पहले ही सोच ले

खुद को एक सहज और गतिशील वक्ता बनाने के लिए जरूरी है की आपको पता हो कि आप किस बारें में बात कर रहें हैं और बहुत अच्छे से पता हो. ज्ञान की कमी आपको बोलते समय चिंता और अनिश्चय की स्थिति में डाल सकती है और यह स्थिति आपकी ओर आपके श्रोताओं की तरफ से आएगी! तैयारी सबसे जरूरी है. जब आप अपनी स्पीच को प्लान कर रहें हो तो यह सुनिश्चित करने का समय निकालें कि यह स्वाभाविक और तार्किक रूप से प्रवाहित हो.

आपको यह भी जानना होगा कि स्पीच देते हुए आप किस प्रकार आगे बढ़ रहें हैं और अपने अच्छे गुणों को बढ़ाते हुए कम अच्छे गुणों को छुपाने का प्रयास करना चाहिए. चाहे पब्लिक में बोलना क्लास में प्रश्न के उत्तर देने जैसी ही कोई बात ना हो, तब भी आपको यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आप अपने विषय को जननने की जरूरत होती है. यह आपको ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करने और आत्मविश्वास के साथ खुद को प्रस्तुत करने में सहायता करेगा, जो आपके श्रोताओं पर आपकी अच्छी छवि बनाएगा.

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8. अपने शरीर को प्रशिक्षित करें

पब्लिक में बोलना एक रेस जीतने जैसा नहीं होता, फिर भी आप ऐसी कुछ चीजें सुनिश्चित कर सकते हैं की आपका शरीर आपका साथ दे. यह सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है की आप अपने वजन को एक पैर से दूसरे पैर पर ना डालें (आप अपने टोज (toes) को स्थिर रखें इससे आप यह नहीं करेंगे). इसमें आपका साँस लेना, खुद को प्रस्तुत करना और यह सुनिश्चित करना कि आप ठीक से बोल रहे है शामिल है. डायफ्रॉम (diaphragm) से बोलें. यह आपको स्पष्ट और जोरदार प्रस्तुतिकरण करने में सहायता करेगा और इससे आपके श्रोताओं को ऐसा नहीं लगेगा कि आप जोर लगा रहे हैं या चिल्ला रहें हैं. एक व्यायाम की तरह, सीधे खड़े हो जाएं और अपने हाथ को अपने पेट पर रख लें.

सांस अंदर लें, और छोड़ें. एक सांस पर 5 तक गिने और एक सांस पर 10 तक गिनें. आप महसूस करेंगे कि आपके पेट में आराम महसूस हो रहा है. आपको सांस लेते हुए अरमयक अवस्था में बोलना चाहिए. अपने सुरों को बदलें. समझें कि आपकी आवाज की ऊंचाई या धुन क्या है. बहुत ऊँची? बहुत धीमी? इतनी धीमी कि कोई सुन ही ना पाए. शांत रहना, एक आरामदायक स्थिति में (पर सीधे) खड़े रहना और ठीक से सांस लेना आपकी सही टोन में बोलने में मदद करेगा. गले या ऊपरी छाती से सांस लेने से बचें, क्योंकि ये दोनों बातें आपकी व्यग्रता को बढ़ा सकती है और आपके गले में तनाव पैदा कर सकती हैं. परिणामस्वरूप, आपकी आवाज ज्यादा तनावपूर्ण और अस्वाभाविक लगेगी.

9. स्पीच बोलने में तेजी लाये

लोग जब सिर्फ बातचीत कर रहे होते है तो बहुत तेजी से बोलते हैं, पर ऐसी रफ़्तार तब काम नहीं करती जब आप एक समूह को सम्बोधित कर रहें हों. जरूरी है कि आपको सुनने वाले आप क्या कह रहें हैं उसे समझें और उन्हें इतना समय मिले कि वो आपकी स्पीच का मतलब निकाल पाएं. ज्यादा धीमा बोलने और सामान्य बातचीत की टोन से ज्यादा सावधानी बरतने की कोशिश करें. सुनिश्चित करें कि आप अलग अलग आइडियाज के बीच में अंतराल रखें, या विशेषरूप से महत्वपूर्ण प्रसंगो/थीम्स पर, ताकि आपके श्रोता आपने क्या कहा उसे समझ पाएं.

सही उच्चारण और अभिव्यक्ति का अभ्यास करें. अभिव्यक्ति का अर्थ है जब आप कोई आवाज निकाल रहें हो. उच्चारण के लिए, आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि आप सभी शब्दों का उच्चारण करना जानें और ज्यादा कठिन शब्दों के उच्चारण का अभ्यास करें. ‘उम’ और “जैसे” की प्रकार वाले सिर्फ जगह भरने वाले शब्दों को हटा दें. सामान्य बातचीत के लिए ये सब ठीक हैं, पर पब्लिक में इन्हे उपयोग करने से ऐसा महसूस होता है कि आपको खुद ही पता नहीं है कि आप किस बारे में बात कर रहें हैं.

10. स्पीच देने से पहले एक बार उसे पढ़ लेना चाहिए

अपनी स्पीच को जानना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उस विषय को समझना जिस पर आप बोल रहें हैं. स्पीच देने के बहुत अलग अलग तरीके हैं, इसलिए आपको वो तरीका खोजने की जरूरत है जो आपके लिए सही हो. स्पीच देने के लिए, आपको किसी तरह के नोट या आउटलाइन की जरूरत पड़ेगी. या आप याददाश्त से ऐसा कर सकते हैं अगर आप ऐसा करने में समर्थ हैं. आपको सारी चीजें अपने नोट में लिखनी जरूरी नहीं हैं , यद्यपि ऐसी बातों के नोट बना लेना सहायक हो सकता है जैसे “इस जानकारी के बाद थोड़ा रुकना है” या “सांस लेने की याद रखनी है” ताकि आप वास्तव में उन चीजों को करना याद रख सकें.

11. स्पीच को बोलने से पहले सही से याद कर ले

वैसे आपका अपनी स्पीच को या बात करने के बिन्दुओं याद करना जरूरी नहीं है, पर यह आपको आत्मविश्वासी और विषय पर सरल दिखने में बहुत सहायता कर सकता है. फिर भी, सुनिश्चित करें कि आपके पास यह करने के लिए पर्याप्त समय बच जाए. अपनी स्पीच को बार बार लिखें. यह तरीका आपकी स्पीच याद रखने में सहायता करता है. आप इसे जितनी ज्यादा बार लिखते हैं, समय पर इसका याद आना उतना ही आसान हो जाता है. जब आप इसे कई बार लिख चुकें, तो खुद को टेस्ट करें कि आपको यह कितनी अच्छी तरह से याद हुई. अगर इसमें ऐसे कुछ हिस्से हैं जो आप याद नहीं रख पा रहे, उन विशिष्ट हिस्सों को फिर से कई बार लिखें.

अपनी स्पीच को छोटे छोटे हिस्सों में बाँट लें और उन सभी हिस्सों को याद करें. पूरी स्पीच को एक साथ याद करना सचमुच कठिन है. इसे छोटे छोटे हिस्सों में याद करना बेहतरीन तरीका है. लोसी (Loci) पद्धति का उपयोग करें. अपनी स्पीच को पैराग्राफ्स या बुलेट पॉइंट्स में बाँट लें. हर एक बुलेट पॉइंट के लिए एक पिक्चर की कल्पना कर लें. अब आप लोकेशंस के माध्यम से आगे बढ़ेंगे. अगर आपके पास एक विशिष्ट पॉइंट पर कहने को कई बातें है, तो उन्हें उस उस स्थान के आसपास की जगहों से जोड़ लें.

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12. हमे अपने सभी श्रोताओ को जानना चाहिए

आपके लिए यह जानना जरूरी कि आप किन लोगों को स्पीच देने जा रहें हैं, क्योंकि एक प्रकार के लोगों के साथ जो चीजें अच्छी जा सकती हैं वही चीजें दूसरों नाराजगी या बोरियत पैदा कर सकती हैं. उदाहरण के लिए: आप एक बिज़नेस प्रेजेंटेशन में इनफॉर्मल नहीं दिखना चाहेंगे, पर कॉलेज स्टूडेंट्स के किसी ग्रुप के साथ आप इनफॉर्मल हो सकते हैं. हंसी-मज़ाक आपको और आपके श्रोताओं को सहज बनाने के लिए अच्छा रास्ता है. पब्लिक में बोलने वाली ज्यादातर परिस्थितयों में फिट होने वाला एक ना एक प्रकार का हंसी मज़ाक होता ही है. आत्मविश्वास की झलक देनें और वातावरण को हल्का बनाने के लिए थोड़े हंसी-मज़ाक से शुरुवात करना अच्छा तरीका है.

कोई फनी (और सच्ची) कहानी यह करने का एक बढ़िया तरीका है. पता करें कि आप श्रोताओं से क्या पाना या देना चाहते हैं. क्या आप उन्हें कोई नई जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं? या पुरानी जानकारी को ही प्रस्तुत करना चाहते हैं? क्या आप उन्हें कुछ करने पर राज़ी करना चाहते हैं? यह आपको अपनी स्पीच को उस मुख्य विषय पर केंद्रित करने में मदद करेगा जो आप अपने श्रोताओं से करवाना या पाना चाहते हैं.

13. स्पीच से खूब प्रैक्टिस करनी चाहिए

अगर आप अपने पब्लिक में बोलने को सफल बनाना चाहते हैं तो यह बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है. सिर्फ अपने मटेरियल और आप अपनी स्पीच द्वारा श्रोताओं से क्या पाना चाहते हैं यह जानना पर्याप्त नहीं है. आपको इसे इतनी बार करके देख लेना चाहिए कि यह आपको आसान लगने लगे. यह जूते तोड़ने जैसा काम है. पहली बार जब आप इन्हे पहनेंगे तो आपको फ़फ़ोले पड़ेंगे, जल्द ही वो आरामदायक हो जाएंगे और आपको फिट आने लगेंगे! जिस जगह पर आप बोलने वाले हैं वहाँ पहुँचने और प्रैक्टिस करने का प्रयत्न करें.

इससे आपको ज्यादा आत्मविश्वास मिलेगा क्योंकि आप उस क्षेत्र से परिचित हो जाएंगे. अपनी प्रैक्टिसिंग का वीडियो और अपने गुणों और कमजोरियों को खोजें. यद्यपि खुद को वीडियो में देखना डरावना हो सकता है, पर आपके गुण और कमजोरियां कहाँ हैं देखने का यह बहुत अच्छा तरीका है. आप जान सकेंगे कि आपकी घबराहट भरी शारीरिक कमियां क्या हैं और आप उन्हें ख़त्म करने या उन्हें कम से कम करने पर काम कर सकते हैं.

14. संदेश को बोलने से पहले उसे ध्यान से परख लेना चाहिए

स्पीच 3 प्रकार की होती है सूचनाप्रद, प्रेरक, मनोरंजक. जहाँ अलग अलग प्रकारों में परस्पर मिलाप हो सकता है, हर एक का एक विशिष्ट काम होता है जो वो पूरा करती हैं. एक सूचनात्मक स्पीच का मुख्य उद्देश्य तथ्य, विस्तृत जानकारी, और उदाहरण देना होता है. चाहे आप अपने श्रोताओं को प्रभावित करना चाह रहें हो, यह मूल तथ्यों और जानकारियों से सम्बद्ध ही होता है. एक प्रेरक स्पीच आपके श्रोताओं को प्रभावित करने के लिए होती है. इसमें आप फैक्ट्स के साथ साथ भावनाओं, तर्क और स्वयं के अनुभवों का भी उपयोग करेंगे. मनोरंजक स्पीच का उद्देश्य एक सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करती है, पर प्रायः इसमें सूचनात्मक स्पीच की कुछ पहलुओं का उपयोग होता है (जैसे वेडिंग टोस्ट या एक्सेप्टेंस स्पीच.

15. कभी भी किसी बात को घुमाकर नहीं बोलना चाहिए

आपने ऐसी स्पीच जरूर सुनी होगी जिसकी शुरुवात कुछ ऐसे होती है “जब मुझसे ये स्पीच देने को कहा गया, तो मैं सोचने लगा क्या कहूँ….” ऐसा ना करें. यह स्पीच शुरू करने का सबसे बोरिंग उपाय है. यह प्रेसेंटर के व्यक्तिगत जीवन के आसपास ही भटकती रहती है, और मुश्किल से ही उतनी मनोरंजक होती है जितनी प्रेसेंटर सोचता है. अपनी स्पीच की शुरुआत प्रमुख, अतिमहत्वपूर्ण आईडिया और लगभग 3 मैन पॉइंट्स से करें जिनसे आपकी स्पीच को सहारा मिले और बाद में विस्तार में बात की जा सके. आपके श्रोता आपकी स्पीच के किसी भी हिस्से से ज्यादा उसकी शुरुवात और अंत याद रखेंगे. इसकी शुरुवात ऐसे करें कि आपके श्रोताओं का ध्यान सीधा आपकी बात पर जाए. इसका अर्थ है कोई आश्चर्यचकित करने वाले तथ्य या आंकड़े, या कोई प्रश्न पूछिए आपके श्रोताओं का ध्यान अपने पूर्वाग्रहों को पीछे छोड़ते हुए आप पर टिक जाए.

16. एक साफ-सुथरा स्ट्रक्चर रखें

एक बिखरी हुई स्पीच से बचने के लिए, आपको एक साफ़ फॉर्मेट बनाने की जरूरत होगी. याद रखें, आप अपने श्रोताओं को फैक्ट्स और आइडियाज से अभिभूत (overwhelm) करने का प्रयास नहीं कर रहे! एक सबसे महत्वपूर्ण आईडिया रखें. खुद से पूछें आप अपने श्रोताओं से क्या चाहते हैं? आपकी स्पीच से उन्हें क्या लेकर जाना चाहिए? उन्हें आपकी कही बातों से क्यों सहमत होना चाहिए? उदाहरण के लिए: यदि आप साहित्य में राष्ट्रीय ट्रेंड्स पर लेक्चर दे रहे हैं, तो सोचें कि आपके श्रोताओं को क्यों इसकी परवाह होनी चाहिए. आप अपने श्रोताओं के सामने केवल फैक्ट्स उगलना नहीं चाहते.

आपको अपने सबसे महत्वपूर्ण आईडिया को सहारा देने वाले कई मैन पॉइंट्स की जरूरत पड़ेगी. 3 मैन पॉइंट्स आमतौर पर सबसे अच्छी संख्या है. उदाहरण के लिए: अगर आपका प्रमुख आईडिया है कि बच्चों का साहित्य ज्यादा विविधतापूर्ण होता जा रहा है, नए ट्रेंड्स को प्रदर्शित करता हुआ 1 पॉइंट रखें, दूसरा पॉइंट इस नई विविधता के जनता के बीच हो रहे स्वागत से सम्बंधित, और तीसरे पॉइंट में इस बारें में बात करें कि क्यों नया विविधतापूर्ण बच्चों का फिक्शन महत्वपूर्ण है.

17. भाषा का सही उपयोग करें

लिखने और स्पीच देने में भाषा अत्यंत महत्वपूर्ण है. आप बहुत ज्यादा बड़े और दुष्कर शब्दों से दूर रहना चाहेंगे, क्योंकि आपके श्रोता कितने ही स्मार्ट क्यों ना हों, अगर आप उन्हें बड़े बड़े शब्दों में उलझाएंगे तो वे बहुत जल्दी इसमें रूचि खो देंगे. मर्मभेदी क्रिया-विशेषण (adverbs) और विशेषणों (adjectives) का उपयोग करें: आप अपनी स्पीच और श्रोताओं में जान डाल देना चाहते हैं. उदाहरण के लिए:”बच्चो का साहित्य विविध परिपेक्ष्यों की एक रेंज उपलब्ध करवाता है की बजाय कहें “बच्चों का साहित्य अब एक उत्साहजनक और विविध परिपेक्ष्यों की रेंज उपलब्ध करने लगा है.

ऐसी पिक्चरों का उपयोग करें जो आपके श्रोताओं को बैठने और ध्यान देने पर मजबूर कर दे. विंस्टन चर्चिल ने एक वाक्यांश का उपयोग किया था “लोहे का पर्दा जिससे वो सोवियत यूनियन के रहस्यों का वर्णन कर सकें. प्रभाव छोड़ने वाले दृश्य आपके श्रोताओं में एक स्थाई छवि छोड़ जाते हैं जैसा फैक्ट्स में दिखता है “the iron curtain” पूरी दुनियाँ में जाना माना वाक्यांश बन गया था. शब्दों का दोहराव भी लोगों को आपकी स्पीच को लोगों की याद में बसा देने के लिए महत्वपूर्ण है.

18. इसे सादा रखें

आप चाहते हैं कि आपकी पूरी स्पीच को समझें और याद रखें कब आपने स्पीच ख़त्म की. इसका अर्थ असाधारण पिक्चर्स और सरप्राइसिंग फैक्ट्स का होना ही नहीं है, इसका अर्थ सादा और मुद्दे पर होना भी है. अगर आप सम्बंधित विषयों के कठिन क्षेत्रों में फसे रहेंगे, आप अपने श्रोताओं को खो देंगे. छोटे वाक्यों और छोटे वाक्यांशों का प्रयोग करना. इसे नाटकीय प्रभाव तक इस्तेमाल किया जा सकता है. उदाहरण के लिए वाक्यांश “अब कभी नहीं”.

यह छोटा और सीधे मुद्दे पर है और प्रभावशाली है. आप छोटे और तेजस्वी उद्धरण भी उपयोग में ला सकते हैं. बहुत से प्रभावशाली लोगों ने फनी, या शक्तिशाली स्टेटमेंट्स बहुत कम जगह में दिए हैं. आप अपना खुद का ऐसा स्टेटमेंट बनाने की कोशिश कर सकते हैं या पहले से उपस्थित किसी एक का उपयोग कर सकते हैं.

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तो दोस्तों आपको ये तरीके कैसे लगे, हमे जरूर बताये साथ ही हमारी इस पोस्ट को लाइक या शेयर करना ना भूले. धन्यवाद्

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