एक अनोखे तोते की अनोखी कहानी

एक अनोखे तोते की अनोखी कहानी

Ek anokhe tote ki anokhi kahani hindi kahani

दोस्तों ये कहानी है एक तोते पर आधारित. तोता एक ऐसा पक्षी होता है जो की आसानी से लोगो की भाषा को पकड़ लेता है. जानवरो और पक्षियों में ऐसी बहुत सी खुबिया पायी जाती है. अब हम सीधे अपनी कहानी की और बढ़ते है. ये बात बहुत पुराणी है , एक छोटे से गांव में कमल किशोर नाम का एक बहुत ही भला इंसान रहता था. साथ ही उसकी पत्नी भी, जिसका नाम था सुलेखा. एक समय ऐसा आया जब कमल किशोर को अपने काम के सिलसिले से किसी और गांव में जाना पड़ा. जब वो उस गांव के बाजार में पंहुचा तो उसे एक बड़ा ही सुंदर और प्यारा तोता नज़र आया.

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तोते की विशेषता यह थी कि उस से जो भी पूछा जाए उसका उत्तर बिल्कुल मनुष्य की भाँति देता था. इसके अलावा उसमें यह भी विशेषता थी कि किसी मनुष्य की अनुपस्थिति में उसके घर पर जो जो घटनाएँ घटी होती थीं उन्हें भी वह उस मनुष्य के पूछने पर बता देता था. कुछ दिनों बाद उस भद्र पुरुष का विदेश जाना हुआ. जाते समय उसने तोते को अपनी पत्नी के सुपुर्द कर दिया कि इसकी अच्छी तरह देख रेख करना. वह परदेश चला गया और काफी समय बाद लौटा. लौटने पर उसने अकेले में तोते से पूछा कि यहाँ मेरी अनुपस्थिति में क्या क्या हुआ. उसकी अनुपस्थिति में उसकी पत्नी ने खूब मनमानी की थी और शील के बंधन तोड़ दिए थे.

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तोते ने अपने स्वामी से सारा हाल कह सुनाया. स्वामी ने अपनी पत्नी को खूब डाँटा फटकारा कि तू मेरे पीठ पीछे क्या क्या हरकतें करती है और कैसे कैसे गुल खिलाती है. पत्नी पति से तो कुछ न बोली क्योंकि बातें सच्ची थीं. लेकिन यह सोचने लगी कि यह बातें उसके पति को किसने बताई. पहले उसने सोचा कि शायद किसी सेविका ने यह काम किया है. उसने एक एक सेविका को बुलाकर डाँट फटकार कर पूछा किंतु सभी ने कसमें खा खाकर कहा कि हमने तुम्हारे पति से कुछ नहीं कहा है. स्त्री को उनकी बातों का विश्वास हो गया और उसने समझ लिया कि यह कार्रवाई तोते ने की है. उसने तोते से कुछ न कहा क्योंकि तोता इस बात को भी अपने स्वामी को बता देता.

किंतु वह इस फिक्र में रहने लगी कि किसी प्रकार तोते को अपने स्वामी के सन्मुख झूठा सिद्ध करें और अपने प्रति उसके अविश्वास और संदेह को दूर करें. कुछ दिन बाद उसका पति एक दिन के लिए फिर गाँव से बाहर गया. स्त्री ने अपनी सेविकाओं को आज्ञा दी कि रात में एक सेविका सारी रात तोते के पिंजरे के नीचे चक्की पीसे, दूसरी उस पर इस तरह पानी डालती रहे जैसे वर्षा हो रही है और तीसरी सेविका पिंजरे के पीछे की ओर दिया जला कर खुद दर्पण लेकर तोते के सामने खड़ी हो जाए और दर्पण पर पड़ने वाले प्रकाश को तोते की आँखों के सामने रह रह कर डालती रहे. सेविकाएँ रात भर ऐसा करती रहीं और भोर होने के पहले ही उन्होंने पिंजरा ढक दिया. दूसरे दिन वह भद्र पुरुष लौटा तो उसने एकांत में तोते से पूछा कि कल रात को क्या क्या हुआ था.

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तोते ने कहा, ‘हे स्वामी, रात को मुझे बड़ा कष्ट रहा; रात भर बादल गरजते रहे, बिजली चमकती रही और वर्षा होती रही.’ चूँकि विगत रात को बादल और वर्षा का नाम भी नहीं था. इसलिए आदमी ने सोचा कि यह तोता बगैर सिर पैर की बातें करता है और मेरी पत्नी के बारे में भी इसने जो कुछ कहा वह भी बिल्कुल बकवास थी. उसे तोते पर अत्यंत क्रोध आया और उसने तोते को पिंजरे से निकाला और धरती पर पटक कर मार डाला. वह अपनी पत्नी पर फिर विश्वास करने लगा लेकिन यह विश्वास अधिक दिनों तक नहीं रहा.

कुछ महीनों के अंदर ही उसके पड़ोसियों ने उसके उसकी पत्नी के दुष्कृत्यों के बारे में ऐसी ऐसी बातें कहीं जो उस तोते की बातों जैसी थीं. इससे उस भद्र पुरुष को बहुत पछतावा हुआ कि बेकार में ही ऐसे विश्वास पात्र तोते को जल्दी में मार डाला. उस इंसान को बहुत हीज्यादा पछतावा हुआ और उसने तुरंत ही अपनी पत्नी को घर से बहार निकाल दिया.

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तो दोस्तों आपको ये तोते की अनोखी कहानी कैसी लगी, इसके बारे में हमे जरूर बताये. साथ ही आप हमारी इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना ना भूले. धनंयवाद

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