कब्ज का इलाज

कब्ज का इलाज kabj ka ilaj

कब्ज एक बहुत ही बड़ी समस्या होती है. ये किसी को किसी भी उम्र मैं हो सकती है. बचपन हो या जवानी ये किसी को नहीं छोड़ती है. इसका ख्याल रखना बहुत ही जरूरी होता है. आज हम इसी के बारे मैं अपने रूबरू होंगे. कब्ज का अर्थ है अधिक मात्रा में मल का बड़ी आंत में जमा हो जाना. कब्ज के कारण अवरोही आंतों में तरल पदार्थों के अवशोषण में अधिक समय लगने के कारण उनमें शुष्क (ठंडा) व कठोर मल अधिक एकत्रित होने लगता है.

कब्ज उत्पन्न होने का एक आम कारण है जीवन में मल त्याग की साधारण क्रिया का रुकना. किसी नवजात शिशु को शायद ही कभी कब्ज होती है परन्तु उसके विकास के पहले वर्ष में उसे मलत्याग क्रिया सिखाई जाती है, जिससे वह मलत्याग क्रिया को प्रतिदिन होने वाली क्रिया के रूप में मानने लगता है.

कब्ज होने के कारण kabj hone ke karan

कब्ज होने के निम्न कारन होते है.

1.खान पीने में असावधानी

कब्ज व्यक्तियों में गलत खान-पान के कारण उत्पन्न होता है. भोजन में ऐसे पदार्थों का प्रयोग करना जिन्हे पाचनतंत्र आसानी से नहीं पचा पाता जिससे आंत से मल पूर्ण रूप से साफ नहीं हो पाता और अन्दर ही सड़ने लगता है. अधिक मिर्च-मसालेदार तथा गरिष्ठ भोजन करने से भी कब्ज बनता है. अधिकतर व्यक्तियों में कब्ज के ऐसे लक्षण होते हैं जिसमें आंतों की अपने-आप क्रियाशीलता तथा कब्ज के रचनात्मक असामान्यताओं की कमियों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता.

वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिदिन भोजन में प्रयोग किये जाने वाले पदार्थों की जांच से पता चला है कि व्यक्ति अपने भोजन में रेशेदार व तरल पदार्थो का प्रयोग नहीं करते, जिससे मिलने वाली प्रोटीन व विटामिन लोगों को नहीं मिल पाता और जिससे कब्ज उत्पन्न होता है. वैज्ञानिकों के अनुसार सभी व्यक्तियों को प्रतिदिन 10 से 12 ग्राम रेशेदार शाक-सब्जियां तथा 1 से 2 गिलास तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए. साथ ही खाने के बाद या किसी भी समय मल त्याग करने का अनुभव हो तो आलस्य के कारण उसे टालना नहीं चाहिए, बल्कि मलत्याग की इच्छा होने पर मल त्याग जरुर करें.

2.संरचनात्मक असामान्यताएं

आंतों में उत्पन्न घाव आदि के कारण मल त्याग के मार्ग में रुकावट उत्पन्न होती है, जिससे मल त्यागते समय जोर लगाने से दर्द उत्पन्न होता है. दर्द के कारण मलत्याग न करने से मल आंतों में सरककर कब्ज पैदा करता है.

3.व्यवस्थाग्रस्त बीमारी

आंत्रिक नली की तंत्रिकाओं की कुप्रणाली, पेशियों की खराबी, इंडोक्राइन विसंगतियों तथा विद्युत अपघट्य की असामान्यताएं आदि उत्पन्न होकर आंतों में कब्ज बनता है.

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कब्ज दूर करने के उपाय kabj dur karne ke upay

1.यौगिक क्रिया के द्वारा रोग की चिकित्सा

कब्ज को खत्म करने के लिए प्रतिदिन योगक्रिया का अभ्यास करना चाहिए. इससे किसी भी कारण से उत्पन्न होने वाली कब्ज समाप्त हो जाता है.

2.षट्क्रिया (हठयोग क्रिया)

अग्निसार क्रिया या नौली व बस्तीक्रिया का अभ्यास करें.

पेट से सम्बंधित सभी कारणों तथा पेट की मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने के लिए यौगिक क्रिया.

3.आसन

सूर्य नमस्कार, पवन मुक्तासन, त्रिकोणासन, हलासन, ताड़ासन, कटि चक्रासन, मत्स्यासन और अर्ध मत्स्यासन का अभ्यास करें.

4.प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम के साथ कुंभक करें अर्थात सांस को रोकने का अभ्यास करें.

5.बंध

इस रोग में उडि्डयन बन्ध व महाबंध का अभ्यास करें. इन यौगिक क्रियाओं का अभ्यास प्रतिदिन 20 मिनट तक करें.

6.प्रेक्षा

प्राणायाम व बंध के बाद दीर्घ श्वास प्रेक्षा का अभ्यास करें.

7.अनुप्रेक्षा (मन की भावना)

सांस क्रिया करते हुए मन में विचार करें- ´´मेरे अन्दर का कब्ज रोग दूर हो गया है और मैं स्वस्थ हो रहा हूं. मेरा मन और मस्तिष्क शुद्ध हो गया है. ´´मन में ऐसी भावना करनी चाहिए.

8.भोजन

इस रोग में हल्का तथा आसानी से पचने वाला भोजन करें. सलाद व सब्जियां रोजाना खायें. पर्याप्त मात्रा में पानी व फलों का रस पिएं. आधे से ज्यादा चोकर मिलाकर गेंहू तथा जौ की रोटी खाएं.

9.परहेज

स्टार्च युक्त पदार्थों का सेवन न करें तथा नमक कम मात्रा में उपयोग करें. ऐसे पदार्थ का सेवन न करें, जो कब्ज पैदा करते हों.

सभी योगक्रियाओं का अभ्यास सावधानीपूर्वक करें. षट्क्रिया का अभ्यास योग चिकित्सक के कहे अनुसार जरूरत पड़ने पर करें. अन्य योगक्रियाओं का अभ्यास प्रतिदिन करें. अभ्यास हमेशा खाली पेट ही करें. इस तरह से आप कब्ज मैं आसानी से छुटकारा प् सकते हो. लेकिन इन्हे उपयोग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर की सलहा जरूर ले.

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