क्या होती है अंगमर्दक चिकित्सा की विशेषताएं

क्या होती है अंगमर्दक चिकित्सा की विशेषताएं What are the features of angina therapy, health tips in hindi

आज हम आपके सामने उपलब्ध करने जे रहे है अंगमर्दक चिकित्सा की जानकारी.क्योकि इस तकनीक के माध्यम से आप अपनी बहुत सी बीमारियों को का समाधान कर सकते है.आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा से रोगी व्यक्ति का इलाज करने से पहले इसके बारे में बहुत सी बातों को जान लेना बहुत जरूरी है और फिर इसके बाद रोगी व्यक्ति का इलाज करना चाहिए.

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आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के बारे में बातें

1. आमुख Aamukh

वैसे यह आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा परावर्ती चिकित्सा का भाग नहीं है लेकिन कुछ आम चिकित्साओं के लिए जैसे- पेट के रोग, अधिक जुकाम, तेज सिरदर्द, रक्तचाप आदि के लिए लाभकारी है. वैसे देखा जाए तो इस आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा प्रणाली का वर्णन एवं उक्त विकारों के लिए स्थानीय बिन्दुओं पर दबाव देने की पद्धति का उल्लेख करना जरूरी है क्योंकि यह परावर्ती चिकित्सकों के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होगा.

मनुष्य के शरीर पर आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार कई व्यक्तियों पर दबाव देने का समय भिन्न-भिन्न होता है जो इस प्रकार हैं.

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1. व्यक्ति,

2. बिन्दु पर दबाव देने का समय,

3. वयस्क व्यक्ति,

4. 5 से 15 मिनट तक,

5. 7 वर्ष से अधिक लेकिन वयस्कता से पूर्व व्यक्ति,

6. 3 से 10 मिनट तक,

7. 7 वर्ष से कम उम्र के बच्चे,

8. 3 से 7 मिनट,

9. 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चे,

10. 1 से 5 मिनट तक,

मनुष्य की शारीरिक बिन्दुओं पर उम्र के अनुसार ही दबाव देना चाहिए.

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2. आवृति Aavrati

मनुष्य के शरीर की बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए आवृत्ति बीमारी की स्थिति पर निर्भर करती है. एक दिन में एक बार से अधिक भी दबाव दिया जा सकता है या फिर सप्ताह में 7 बार या एक दिन के अन्तर से लेकिन ध्यान यह रखना चाहिए कि ये सब नियम रिफ्लेक्सलॉजी के लिए लागू नहीं होते हैं. इसके साथ-साथ परावर्ती उपचार के बिन्दुओं पर भी ध्यान रखना चाहिए. सभी बिन्दुओं पर दबाव समय के अनुसार ही देना चाहिए.

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3. उंगलियों के द्वारा दबाव देना Fingure se dwara dabav dena

शरीर के बिन्दुओं पर 10 से 15 सेकेण्ड के लिए दबाव दिया जा सकता है लेकिन यह दबाव इतना तेज होना चाहिए कि रोगी व्यक्ति दबाव को महसूस कर सके. लेकिन दबाव इतना तेज भी नहीं देना चाहिए कि रोगी व्यक्ति के शरीर के बिन्दु वाले स्थान पर निशान पड़ जाए.

4. सामान्य निर्देश General direction

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार किसी भी व्यक्ति का इलाज शुरू करते समय, यह ध्यान देना चाहिए कि जहां पर रोगी व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है वह स्थान अधिक तापमान, अधिक ठण्डा या फिर अधिक गर्म न हो. रोगी व्यक्ति का इलाज करने के लिए, उसे सुविधाजनक स्थिति में बैठाकर करना चाहिए. रोगी के शरीर की बिन्दुओं पर दबाव देते समय हाथ की उंगली की गति इतनी तेज होनी चाहिए कि एक मिनट में लगभग 100 बार प्रेशर दे रहे हो. रोगी के शरीर की संवेदनशील त्वचा पर दबाव देने से पहले टेलकम पाउडर छिड़क लेना चाहिए ताकि दबाव वाली जगह पर सूजन न हो.

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5. पेट Stomach

रोगी के पेट से सम्बन्धित रोगों को ठीक करने के लिए पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए और पेट के इन बिन्दुओं पर दबाव हल्का देना चाहिए.

पेट की नौ बिन्दुएं निम्नलिखित हैं.

1. पेट के ऊपर पहला बिन्दु उस भाग पर होता है जहां पर छाती की दोनों पसलियां आपस में एक-दूसरे से मिलती है.

2. रोगी के पेट का दूसरा बिन्दु नाभि से लगभग दो इंच ऊपर पेट की छोटी आंत के पास होता है.

3. पेट की तीसरा बिन्दु पेट के निचले भाग जहां पर मूत्रपिण्ड होता है, उस जगह पर स्थित होती है.

4. पेट का चौथा बिन्दु तीसरे बिन्दु से 45 डिग्री का कोण बनाते हुए, दाहिनी तरफ नाभि से 2 इंच तथा श्रेणि अस्थि के पास, जहां पर सीकम या बड़ी आंत का आखिरी भाग है वहां पर स्थित होता है.

5. पेट का पांचवा बिन्दु पेट के दाईं ओर छाती की पसली के नीचे पेट के किनारे पर, जहां लीवर है वहां स्थित होता है.

6. पेट का छठा बिन्दु पेट के बाईं तरफ ठीक पांचवे बिन्दु के सामने जहां पर स्पलीन है वहां पर स्थित होता है.

7. पेट का सातवां बिन्दु छठे बिन्दु के नीचे की सीध में जहां पर डिसेन्डिंग कोलन है वहां पर स्थित होता है.

8. पेट का आठवां बिन्दु सातवें बिन्दु से चार उंगलियों के नीचे तिर्यक रेखा में जहां सिग्माइड है वहां पर स्थित होता है.

9. पेट का नौवा बिन्दु तीसरे बिन्दु से ठीक दो इंच नीचे जहां पर रेक्टम तथा मलाशय है वहां पर स्थित होता है.

जब पेट की इन बिन्दुओं पर दबाव देने की आवश्यकता हो उस समय खाना नहीं खाना चाहिए अर्थात इन बिन्दुओं पर दबाव खाली पेट देना चाहिए. जब इन बिन्दुओं पर दबाव दे रहे हो तो दबाव देने से पहले श्वास लेना चाहिए फिर इसके बाद श्वास को रोककर दबाव देना चाहिए. इसके बाद दबाव कम करते समय नि:श्वास (श्वास छोड़े) करें.

पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव देने के नियम निम्नलिखित हैं.

1. पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव एक बार में कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए.

2. पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव एक बिन्दु से नौ बिन्दु तक क्रमानुसार देना चाहिए और दबाव पेट के ऊपरी भाग से शुरू करके मूत्रद्वार तक देना चाहिए.

3. पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव देते समय हाथ की दाहिनी हथेली को नीचे तथा बायीं हथेली को ऊपर रखना चाहिए.

4. पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव देने से पहले लम्बी गहरी श्वास लेना चाहिए फिर जब दबाव को कम कर रहे हो या फिर दबाव देना बंद कर रहे हो तब श्वास को छोड़ना चाहिए.

5. पेट के नौ बिन्दुओं पर दबाव एक या दो बार हथेलियों से देना चाहिए. इसके बाद दबाव दोनों हाथों के मध्य की 3 उंगुलियों के शीर्ष को मिलाते हुए देना चाहिए तथा इस प्रकार से दबाव देते समय श्वास को छोड़ना चाहिए. इस दबाव की क्रिया को कम से कम तीन बार दोहराना चहिए और फिर इन बिन्दुओं पर दबाव खड़े होकर या फिर लेटकर देना चाहिए.

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6. साईनुसाइटिस Sainusitis

आंख, कान, नाक तथा मस्तिष्क के अग्र भाग के गड्डों में जब बलगम या मवाद इकट्ठी (जमा) हो जाती है, तब उस अवस्था (विकार) को साईनुसाइटिस कहते है. जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो इस कारण व्यक्ति का दम घुटने लगता है तथा उसे अपना सिर भारी-भारी लगने लगता है. रोगी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है. इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति को नींद भी अच्छी नहीं आती है तथा उसे थकान भी अधिक होने लगती है. रोगी व्यक्ति को कई प्रकार की एलर्जी भी हो जाती है. साईनुसाइटिस रोग के होने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे-अधिक कफ निकलना, अधिक सर्दी लगना, नाक बंद हो जाना या फिर छाती में कफ जम जाना आदि.

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार साइनस के 4 भाग होते हैं जो इस प्रकार हैं.

1. मैक्सीलरी साइनस- यह भाग ऊपरी जबड़े की हड्डी के अन्दर वाले भाग में स्थित होता है.

2. फ्रन्टल साइनस- यह भाग भौंहे के ऊपर वाली ललाटीय (माथे पर) भाग में स्थित होता है.

3. इथमायड साइनस- यह भाग नाक तथा आंख के बीच का भाग होता है.

4. स्फैलायडल साइनस- यह भाग कान तथा आंख के बीच का तथा आंख की भौंहे की सिरे से लगा हुआ होता है.

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आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा उपचार Aadhunik angmardak chikitsa upchar

1. रोगी व्यक्ति के खोपड़ी में गर्दन की ओर एक गड्ढा होता है जिसे मेडूला आब्लांगेटा कहते है. इस बिन्दु पर 5 सेकेण्ड तक दबाव देना चाहिए.

2. रोगी व्यक्ति के आंखों के अन्दर की छोर पर तथा नाक से सटे हुए नासिका के बिन्दुओं पर 3 सेकेण्ड तक दबाव देना चाहिए.

3. रोगी व्यक्ति की नाक के मध्य भाग में जो नाक की हड्डी के छोर पर स्थत है, उस जगह की बिन्दु पर तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए.

4. रोगी व्यक्ति की नाक के पास वाले भाग के दोनों तरफ नासिका बिन्दु स्थित होते हैं, उस भाग के बिन्दुओं पर दबाव कम से कम 3 सेकेण्ड के लिए देना चाहिए.

5. रोगी व्यक्ति के गाल की हड्डी के निचले वाले भाग जो दोनों ओर जबड़े पर होते हैं उस भाग की बिन्दुओं पर कम से कम तीन सेकेण्ड तक दबाव देना चाहिए.

6. रोगी व्यक्ति के कान और आंख के बीच वाले भाग पर जो बिन्दु होता है उस पर प्रेशर देने के लिए अंगूठे के सिरे का उपयोग करना चाहिए तथा इस भाग पर कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए.

7. रोगी व्यक्ति की दोनों आंखों के अन्दर की ओर जो हड्डी हैं उसके बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए.

8. रोगी व्यक्ति के माथे की बिन्दुओं पर कम से कम तीन सेकेण्ड तक दबाव देना चाहिए.

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7. उच्च रक्तचाप High blood pressure

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार उच्च रक्तचाप 120 डिग्री सेल्शियस तथा डाइस्टोलिक रक्तचाप 80 डिग्री सेल्शियस होता है. उच्च रक्तचाप को हाइपरटेन्शन (हाइ ब्लडप्रेशर) या फिर उच्च तनाव भी कहा जाता है. हाई ब्लडप्रेशर एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है. इस रोग के कारण और भी कई दूसरे रोग व्यक्ति के शरीर में हो जाते हैं.

उच्च रक्तचाप से अनेक रोग हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं.

1. हृदय के अनेक रोग

2. धमनियों की कठोरता

3. ब्रेन हेमरेज

4. आंखों से सम्बन्धित अनेक रोग

5. कम आयु में मृत्यु हो जाना

इसलिए उच्च रक्तचाप का रोग होने पर तुरन्त इसका इलाज कराना चाहिए नहीं तो व्यक्ति को ब्लडप्रेशर से सम्बन्धित अनेक रोग हो सकते हैं. आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार ब्लडप्रेशर के रोगों को ठीक करने के लिए अनेक बिन्दु बताए गए हैं, जिन पर कुछ सेकेण्डों तक प्रतिदिन दबाव देने से हाई ब्लडप्रेशर का रोग ठीक हो सकता है और रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है.

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उच्च रक्तचाप को रोकने के लिए बिन्दु High blood pressure ko rokne ke liye bindu

1. ग्रीवा धमनी से सम्बन्धित बिन्दु जो गले पर स्थित होता है. इस बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए उंगलियों के ऊपरी भाग का इस्तेमाल करना चाहिए तथा इन बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए और इसके बाद इस क्रिया को तीन बार दोहराना चाहिए.

2. धड़कनों से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए उंगलियों के ऊपरी भाग का इस्तेमाल करना चाहिए. इस बिन्दु पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए और इस क्रिया को तीन बार दोहराना भी चाहिए. जब इन बिन्दुओं पर दबाव दे रहे हो तब गहरी श्वास लेनी चाहिए और फिर इसके बाद धीरे से अपने श्वास को छोड़ना चाहिए. इस प्रकार की क्रिया को गर्दन की दूसरी तरफ भी करना चाहिए. इन बिन्दुओं पर दबाव देते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दबाव गर्दन की दोनों तरफ एक साथ न दें क्योंकि इससे गर्दन दबाकर, रोगी व्यक्ति का दम घुट सकता है.

3. हाई ब्लडप्रेशर के रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति के गर्दन के पीछे की ओर अपने दोनों हाथ की उंगलियों को सोलरफ्लेक्स के भाग पर रखे अर्थात पेट के बीच में ऊपरी भाग पर पसलियों के नीचे. इस भाग के बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को सांस छोड़ने के लिए कहना चाहिए. इसके बाद इन बिन्दुओं पर दबाव देना चाहिए. यह दबाव 3 सेकेण्ड के लिए देना चाहिए. इस प्रकार से उपचार कम से कम तीन बार करना चाहिए.

4. मेडूला आब्लांगेटा भाग के बिन्दुओं पर अंगूठे से दबाव देना चाहिए.

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पैर के परावर्ती प्रभाग Per ke pravarti prabhag

1. डायाफ्राम

2. किडनी

3. एड्रेनल

4. थायरायड.

8. निम्न रक्तचाप Low blood pressure

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का रक्तचाप निम्न हो जाता है तो उसे अधिक कमजोरी होने लगती है जिसके कारण वह अधिक सोच-विचार करने लगता है. इस रोग के लक्षण यदि तेज न भी हो तो भी इसका इलाज जल्दी ही कराना चाहिए नहीं तो इस रोग के कारण व्यक्ति को और भी कई प्रकार के रोग हो सकते हैं जो इस प्रकार है-

1. सिर में दर्द होना.

2. चक्कर आना.

3. शरीर अधिक थका-थका सा लगना.

4. आंखों के आगे अंधेरा सा छाना.

5. छाती में जकड़न महसूस होना.

6. हृदय की धड़कन बढ़ जाना.

7. चलने-फिरने की शक्ति कम हो जाना.

तो दोस्तों आप आसानी से अंगमर्दक चिकित्सा के बारे में जान सकते है. वो भी इस जानकारी के माध्यम से.

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