चुड़ैल से हुआ प्रेम एक कहानी

चुड़ैल से हुआ प्रेम एक कहानी Chudel se hua prem ek kahani real ghost stories in hindi

 

मेरा नाम अशोक कुमार है और मैं कानपूर का रहने वाला हु, और अपने दोस्त दिनेश की कहानी आज आप लोगो के सामने रख रहा हु. जो की इस प्रकार है. दिनेश को एक चुड़ैल से प्रेम हो गया था. बात कोई 14-15 साल पुरानी है. मेरे माने तो एकदम सही. उस समय दिनेश की उम्र कोई 24-25 साल थी और आप लोगों को तो पता ही है कि गाँवों में इस उम्र में लोग बच्चों के बाप बन जाते हैं मतलब परिणय-बंधन में तो बँध ही जाते हैं. हाँ तो दिनेश की भी शादी हुए लगभग 3-4 साल हो गए थे और ढेड़-दो साल पहले ही उसका गौना हुआ था. उस समय दिनेश घर पर ही रहता था और अपनी एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर रहा था. यह घटना जब घटी उस समय दिनेश एक 20-25 दिन की सुंदर बच्चे का पिता बन चुका था. हाँ एक बात मैं आप लोगों को बता दूँ कि दिनेश की बीबी बहुत ही निडर स्वभाव की महिला थी. यह गुण बताना इसलिए आवश्यक था कि इस कहानी की शुरुवात में इसकी निडरता अहम भूमिका निभाती है. एक दिन की बात है कि दिनेश की बीबी ने अपनी निडरता का परिचय दिया और अपनी नन्हीं बच्चे और दिनेश को बिस्तर पर सोता हुआ छोड़ चार बजे सुबह उठ गई. ऐसा नहीं था कि दिनेश की बीबी पहली बार चार बजे जगी थी, अरे भाई वह प्रतिदिन चार बजे ही जगती थी पर निडरता का परिचय इसलिए कह रहा हूँ कि और दिनों की तरह उसने घर के किसी महिला सदस्य को जगाया नहीं और अकेले ही दिशा मैदान हेतु घर से बाहर निकल पड़ी. खैर दिनेश की बीबी ने अपनी निडरता दिखाई और वह निडरता उसपर भारी पड़ी. वह अकेले घर से काफी दूर खेतों की ओर निकल पड़ी. हुआ यह कि उसी समय पंडी जी के श्रीफल पर रहने वाली चुड़ैल उधर घूम रही थी और न चाहते हुए भी उसने दिनेश की बीबी पर अपना डेरा डाल दिया. हाँ फर्क सिर्फ इतना था कि वह पहले दूर-दूर से ही दिनेश की बीबी का पीछा करती रही पर अंततः उसने अपने आप को रोक नहीं पाई और ज्यों ही दिनेश की बीबी घर पहुँची उस पर सवार हो गई.

दिनेश भी लगभग 4 बजे जगा और भैंस आदि को चारा देने के लिए घर से बाहर चला गया. जब वह घर में वापस आया तो अपनी बीबी की हरकतों में बदलाव देखा. उसने देखा कि उसकी बच्चे रो रही है पर उसकी बीबी आराम से पलंग पर बैठकर पैर पसारे हुए कुछ गुनगुना रही है. दिनेश एकबार अपनी रोती हुई बच्चे को देखा और दूसरी बार दाँत निपोड़ते और पलंग पर बेखौफ बैठी हुई अपनी बीबी को. उसको गुस्सा आया और उसने बच्चे को अपनी गोद में उठा लिया और अपनी बीबी पर गरजा, “बच्चे रो रही है और तुम्हारे कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है.” अरे यह क्या दिनेश की बीबी ने तो दिनेश के इस गुस्से को नजरअंदाज कर दिया और अपने में ही मस्त बनी रही. दिनेश का गुस्सा और बढ़े इससे पहले ही दिनेश की भाभी वहाँ आ गईं और दिनेश की गोदी में से बच्चे को लेते हुए उसे बाहर जाने के लिए कहा. अरे यह क्या दिनेश का गुस्सा तो अब और भी बढ़ गया, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आज क्या हो रहा है, जो औरत अपने से बड़ों के उस घर में आते ही पलंग पर से खड़ी हो जाती थी वही बीबी आज उसके भाभी के आने के बाद भी पलंग पर आराम से बैठे मुस्कुरा रही है. खैर दिनेश तो कुछ नहीं समझा पर उसकी भाभी को सबकुछ समझ में आ गया और वे हँसने लगी. दिनेश को अपनी भाभी का हँसना मूर्खतापूर्ण लगा और वह अपने भाभी से बोल पड़ा, “अरे आपको क्या हुआ? ये उलटी-पुलटी हरकतें कर रही है और आप हैं कि हँसे जा रही हैं.” दिनेश के इतना कहते ही उसकी भाभी ने उसे मुस्कुराते हुए जबरदस्ती बाहर जाने के लिए कहा और यह भी कहा कि बाहर से दादाजी को बुला लीजिए.

भाभी के इतना कहते ही कि दादाजी को बुला लाइए, दिनेश सब समझ गया और वह बाहर न जाकर अपनी बीबी के पास ही पलंग पर बैठ गया. इतने ही देर में दिनेश के घर की सभी महिलाएँ वहाँ एकत्र हो गई थीं और अगल-बगल के घरों के भी कुछ नर-नारी. अरे भाई गाँव में इन सब बातों को फैलते देर नहीं लगती और तो और अगर बात भूत-प्रेत की हो तो और भी लोग मजे ले लेकर हवाई जहाज की रफ्तार से खबर फैलाते हैं. हाँ तो अब मैं आप को बता दूँ कि दिनेश के कमरे में लगभग 11-13 मर्द-औरतों का जमावड़ा हो चुका था और दिनेश ने भी सबको मना कर दिया कि यह खबर खेतों की ओर गए दादा जी के कान तक नहीं पहुँचनी चाहिए. दरअसल वह अपने आप को लोगों की नजरों में बहुत बुद्धिमान और निडर साबित करना चाहता था. वह तनकर अपनी बीबी के सामने बैठ गया और अपनी बीबी से कुछ जानने के लिए प्रश्नों की बौछार शुरु कर दी.

दिनेश, “कौन हो तुम?”

दिनेश की बीबी कुछ न बोली केवल मुस्कुराकर रह गई.

दिनेश ओझाओं की तरह फिर गुर्राया, “मुझे ऐसा-वैसा न समझ. मैं तुमको भस्म कर दूँगा.”

दिनेश की बीबी फिर से मुस्कुराई पर इस बार थोड़ा तनकर बोली, “तुम चाहते क्या हो?”

बहुत सारे लोगों को वहाँ पाकर दिनेश थोड़ा अकड़ेबाजों जैसा बोला, “ ‘तुम’ मत बोल. मेरे साथ रिस्पेक्ट से बातें कर. तुम्हें पता नहीं कि मैं ब्राह्मण कुमार हूँ और उसपर भी बजरंगबली का भक्त.”

दिनेश के इतना कहते ही उसकी बीबी थोड़ा सकपकाकर बोली, “मैं पंडी जी के श्रीफल पर की चुड़ैल हूँ.”

अपने बीबी के मुख से इतना सुनते ही तो दिनेश को और भी जोश आ गया. उसे लगने लगा कि अब मैं वास्तव में इसपर काबू पा लूँगा. वहाँ खड़े लोग कौतुहलपूर्वक दिनेश और उसकी बीबी की बातों को सुन रहे थे और मन ही मन प्रसन्न हो रहे थे, अरे भाई मनोरंजन जो हो रहा था उनका. दिनेश फिर बोला,”अच्छा. पर तूने इसको पकड़ा क्यों? तुमके पता नहीं कि यह एक ब्राह्मण की बहू है और नियमित पूजा-पाठ भी करती है.”

दिनेश की चुड़ैल पीड़ित बीबी बोली, “मैंने इसको जानबूझकर नहीं पकड़ा. इसको पकड़ना तो मेरी मजबूरी हो गई थी. यह इस हालत में अकेले बाहर गई क्यों? खैर अब मैं जा रही हूँ. मैं खुद ही अब अधिक देर यहाँ नहीं रह सकती.” दिनेश अपने बीबी की इन बातों को सुनकर बोला, “क्यों क्या हुआ? डर गई न मुझसे.”

दिनेश के इतना कहते ही फिर उसकी बीबी मुस्कुराई और बोली, “तुमसे क्या डर. मैं तो उससे डर रही हूँ जो इस घर पर लटक रहा है और मुझे जला रहा है. अब उसका ताप मुझे सहन नहीं हो रहा है.”चुड़ैल की बात सुनकर दिनेश हँसा और बोला, “जा मत यहीं रह जा. जैसे हमारी एक बीबी है वैसे ही तुम एक और.”दिनेश के इतना कहते ही वह चुड़ैल हँसी और बोली, “यह संभव नहीं है पर तुम मुझसे शादी क्यों करना चाहते हो?” दिनेश बोला, “अरे भाई गरीब ब्राह्मण हूँ. कुछ कमाता-धमाता तो हूँ नहीं. तूँ रहेगी जो थोड़ा धन-दौलत लाती रहेगी.”दिनेश के इतना कहते ही वह चुड़ैल बोली, “तुम बहुत चालू है. और हाँ यह भी सही है कि हमारे पास बहुत सारा धन है पर उसपर हमारे लोगों का पहरा रहता है अगर कोई इंसान वह धन लेना चाहे तो हमलोग उसका अहित कर देती हैं. हाँ और एक बात, और वह धन तुम जैसे जीवित प्राणियों के लिए नहीं है.”

दिनेश अब थोड़ा शांत और शालीन स्वभाव में बोला, “अच्छा ठीक है, तुम जरा कृपा करके एक बात बताओ, ये भूत-प्रेत क्या होते हैं, क्या तुमने कभी भगवान को देखा है, आखिर तुम कौन हो, क्या पहले तुम भी इंसान ही थी?” चुड़ैल भी थोड़ा शांत थी और शांत थे वहाँ उपस्थित सभी लोग. क्योंकि सबलोग इन प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते थे. चुड़ैल ने एक गहरी साँस भरा और कहना आरंभ किया, “भगवान क्या है, मुझे नहीं मालूम पर कुछ हमारे जैसी आत्माएँ भी होती हैं जिनसे हमलोग बहुत डरते हैं और उनसे दूर रहना ही पसंद करते हैं. हमलोग उनसे क्यों डरती हैं यह भी मुझे पता नहीं. वैसे हमलोग पूजा-पाठ करनेवाले लोगों के पास भी भटकना पसंद नहीं करते और मंत्रों आदि से भी डरते हैं.”दिनेश फिर पूछा, “खैर ये बताओ कि तुम इसके पहले क्या थी? तुम्हारा घर कहाँ था, तुम चुड़ैल कैसे बन गई.” चुड़ैल ने दिनेश की बातों को अनसुना करते हुए कहा, “नहीं, नहीं..अब मैं जा रही हूँ. अब और मैं यहाँ नहीं रूक सकती. वे आ रहे हैं.”चुड़ैल के इतना कहते ही कोई तो कमरे में प्रवेश किया और दिनेश को डाँटा, “दिनेश. यह सब क्या हो रहा है? क्या मजाक बनाकर रखे हो?” दिनेश कुछ बोले इससे पहले ही क्या देखता है कि उसकी बीबी ने साड़ी का पल्लू झट से अपने सर पर रख लिया और हड़बड़ाकर पलंग पर से उतरकर नीचे बैठ गई और धीरे-धीरे मेरी बेटी-मेरी बेटी कहते हुए दिनेश की भाभी की गोद में से बच्चे को लेकर दूध पिलाने लगी.

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