जाने हस्तमैथुन रोग का देशी इलाज हिंदी में

जाने हस्तमैथुन रोग का देशी इलाज हिंदी में Let’s treat indigenous treatments in Hindi, sex tips in hindi

Health tips in hindi

हस्तमैथुन रोग यदि किसी को हो जाये, तो वो इंसान जल्दी से बीमार होता चला जाता है. इसलिए इसका इलाज जल्द से जल्द कर लेना चाहिए. हस्तमैथुन ऐसी क्रिया है जिसमें रोगी अकेले में अपने ही हाथो से लिंग को घिसकर अपने वीर्य को निकालता रहता है. इसको करने से मानसिक और शारीरिक रोग पैदा हो जाते हैं. मानसिक रोगी दूसरों के सामने भी हस्तमैथुन करने से नहीं हिचकिचाता है. यह कार्य अविवाहित व्यक्ति ज्यादा करते है. यह कार्य स्त्रियां भी कर लेती है. अपनी योनि पर उंगुलियों से रगड़कर वे भी स्खलित कर लेती है यह भी हस्तमैथुन का ही रोग कहलाता है.

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हस्तमैथुन रोग का उपचार Hastmaithun rog ka upchar

1. छोटा गोखरू

छोटा गोखरू और तिल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. रोजाना सुबह-शाम 4 से 8 ग्राम यह चूर्ण मिश्री मिले गाय के दूध के साथ खाने से हस्तमैथुन से होने वाले रोग दूर होते हैं. इसका सेवन करने से हस्तमैथुन से पैदा होने वाली नपुंसकता भी दूर हो जाती है.

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2. कुचला

लगभग चौथाई ग्राम कुचला को सुबह और शाम लेने से हस्तमैथुन से पैदा होने वाली नपुंसकता में लाभ होता है.

3. काहू

कामवासना पर नियंत्रण रखने के लिये जंगली काहू के बीज का चूर्ण 1 से 3 ग्राम रोजाना 2 बार लेने से लाभ होता हैं.

4. बेलपत्र

10 से 20 मिलीलीटर विल्वपत्र का रस सुबह-शाम पीने से कामइच्छा काबू में होती है, जिससे हस्तमैथुन की ओर से मन हट जाता हैं.

5. धनिया

धनिया का काढ़ा अनुपान या सहपान के रूप में खाने से हस्तमैथुन के रोग में लाभ होता है.

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6. गोखरू

गोखरू फल और तिल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा मं् बकरी के दूध के साथ खाने से हस्तमैथुन से होने वाले सारे रोग दूर हो जाते हैं.

7. आंवला

हस्तमैथुन से धातु (वीर्य) पतला हो गया हो तो सबसे पहले इस हस्तमैथुन की आदत छोड़ दें. आंवलों तथा हल्दी को समान मात्रा में पीसकर घी डालकर सेंके और भूने. सेंकने के बाद इसमें दोनों के वजन के बराबर पिसी हुई मिश्री मिला लें. एक चाय के चम्मच भरकर सुबह-शाम गर्म दूध से इसकी फंकी लेना लाभकारी रहता है.

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अगर मैथुन का वेग रोक दिया जाये तो

1. लिंग में दर्द

2. प्रमेह का रोग

3. सुजाक

4. चिंता

5. मैथुन-संभोग करने में अरूचि

6. भोजन में अरूचि

7. भ्रम आदि रोग हो सकते हैं.

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