डर को कैसे नियंत्रित करें ?

डर को कैसे नियंत्रित करें ? Dar ko kese niyantrit kere

दोस्तों आज हम बात कर रहे है डर की , डर क्या है और क्यों लगता है, जो भी काम हम नहीं कर सकते उससे हमें डर लगने लगता है, या हमारा मन मान लेता है हम ये काम नहीं कर सकते , वही हमारा डर है! तो आज हम आपको अपने डर पर कैसे नियंत्रण रखा जाये , यही बताएँगे .

1. डर को अपने पर हावी न होने दे

डर को अपने पर हावी न होने दे, अगर कोई बात ऐसी है जो आपको डराती है उस बात को अपने पर हावी न होने दे, मन को कही और लगाए, क्योकि मन सच्चा है, जो जहा लेकर जाता वही चल देता, तभी तो कहा जाता है
” मन चंगा तो कठोती में गंगा “

2. वो हर काम जो आपको डराता है , धीरे धीरे कोशिश करे उस काम को करने की.

हम सबको किसी न किसी चीज़ से डर ज़रूर लगता है, इसलिए डर को खत्म करने के लिए सामना करने की कोशिश करे, वो हर चीज़ जो आपको डराती है, उसका डटकर सामना करो, ताकि डर भाग जाये क्योकि:-
“मन के हारे हार से मन के जीते जीत”

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3. मन को मज़बूत रखे और शांत रखे.

मन को मज़बूत रखे और शांत रखे ताकि डर दिल और दिमाग पर हावी न हो, अच्छा सोचे और अच्छा करे, ऐसा करने से डर मन से कोसो दूर चला जायेगा.

4. वही काम करे जिससे किसी को नुक्सान न हो, डर से बचने का सबसे चूक उपाय.

वही काम करे जिससे किसी को नुक्सान न हो, डर से बचने का सबसे चूक उपाय होता है , अगर आप सही काम करेंगे तो डर का तो सवाल ही नहीं होता. हमको डर तब लगता है जब हमने कुछ गलत करते है, इसलिए हमेश सही काम करे..

5. अपने आपको हमेशा वयस्थ रखे ताकि आपका मन यहाँ वहा ना जाये

अपने आपको हमेशा वयस्थ रखे ताकि आपका मन यहाँ वहा ना जाये, किसी भी डर को जगह मन में ही मिलती है, तो आप अपने मन और दिमाग को इतना वयस्थ कर लो की डर के लिए जगह ही न रहे, क्योकि :-
” खाली दिमाग शैतान का घर होता है “

6. वहम को हमेशा खुद से दूर रखे.

वहम को हमेशा खुद से दूर रखे, क्योकि वहम डर की जड़ है, वहम को दिल और दिमाग पर हावी न होने दे, ये एक ऐसा रोग है जो धीरे धीरे डर को ताकतवर बना देता है, और इससे कही दिल और रिश्ते टूट जाते है.

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7. खुद से कहानियाँ ना बनाये, सच को समझने की समझ.

खुद से कहानियाँ ना बनाये, सच को समझने की समझ आपको होनी चाहिए , क्योकि डर का कारन ये भी हो सकता है, कभी भी खुद से कुछ न जोड़े , जो हुआ है जैसा हुआ है , वही रहे तो ठीक वार्ना खुद की कहानियो से तो पोल खुल जाने डर हमेशा मन में रहता है. तभी तो बोलै जाता है:-
” ख़याली पुलाव नहीं पकाना चाहिए”

8. डर को प्यार से मात दे सकते है

डर को प्यार से मात दे सकते है, अगर कोई बच्चा सोते हुए डर जाये तो माँ उस बच्चे को सीने से लगा लेती है, माँ का प्यार उस डर को ख़तम कर देता है, जब प्यार में इतनी शक्ति है की वो बेजुबान बच्चे के डर को माँ के सीने से लगा लेने से ख़तम कर सकता है , तो हर किसी के मन में प्यार आ जाये तो डर तो खुद बा खुद ख़तम हो जायेगा.

9. वर्तमान में जिये, क्योकि डर वर्तमान का नहीं बल्कि भविषय का होता है .

वर्तमान में जिये, क्योकि डर वर्तमान का नहीं बल्कि भविषय का होता है, आज कल की रोजाना ज़िन्दगी मैं हम हमेशा भविषय को सोच सोच कर डरते रहते है, पर उस डर से हमारा आज ख़राब हो रहा है, सोचा है एक डर पूरी लाइफ को बर्बाद कर सकता है , और एक ख़ुशी ज़िन्दगी दे सकती है,

आज हमने आपको डर को नियंत्रित करने के कुछ तरीके बताये , आशा करते है आपको हमारा ये कंटेंट अच्छा लगेगा और हमारा मोटिव भी समझ में आएगा,

” डर से बढ़ा कोई शत्रु नहीं होता
और प्यार से बड़ी कोई ताकत नहीं होती “

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