डिम्ब-ग्रंथियों की जलन के लक्षण

डिम्ब ग्रंथियों की जलन के कारण और इलाज dimb granthiyo ki jalan ke karan aur ilaj mahila ke rog aur ilaj

डिम्ब ग्रंथियों की जलन का इलाज आपको तुरंत ही कर लेना चाहिए. क्योकि यदि ये रोग बढ़ जाये , तो आपको बहुत ही ज्यादा समस्या हो सकती है. इसलिए आज हम आपको कुछ मेडिसिन के बारे में बताने जा रहे है. साथ ही इसके इलाज के लिए डॉक्टर की सलहा जरूर ले.

डिम्ब-ग्रंथियों की जलन के लक्षण dimb grantiyo ki jaln ke lakshan

1.इस रोग से पीड़ित स्त्री के उरु संधि के कुछ ऊपर दर्द होता है

2.पेट के अन्दर कनकनाहट महसूस होती रहती है

3.पेट दबने या हिलने-डुलने पर दर्द बढ़ने लगता है

4.बुखार भी हो जाता है

5.उल्टी आती है

डिम्ब-ग्रंथियों की जलन को ठीक करने के लिए मेडिसिन से उपचार dimb granthiyo ki jalan ko thik karne ke liye medicine se upchar

1.बेलेडोना

यदि किसी स्त्री के डिम्ब-ग्रंथियों में जलन हो तथा इसमें सुई गड़ने की तरह दर्द हो तो ऐसी अवस्था में उपचार करने के लिए बेलेडोना औषधि की 3x मात्रा का प्रयोग करना उचित होता है.

2.कोनायम

यदि किसी स्त्री की डिम्बकोष कड़ा हो गया हो लेकिन इसमें पीब न बन पाया हो तब इस अवस्था में उपचार करने के लिए कोनायम औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करें, यदि इससे लाभ न मिले तो उपचार के लिए प्लाटिना औषधि की 6 शक्ति, ग्रैफा औषधि की 30 शक्ति या थूजा औषधि की 6 शक्ति का उपयोग किया जा सकता है.

3.ब्रायोनिया

रोगी स्त्री अगर गहरी सांस लेती है तो उसकी डिम्ब-ग्रंथियों के स्थान में सुई चुभने जैसा दर्द होता है, डिम्ब-ग्रंथियों के स्थान पर जरा सा छूना भी रोगी स्त्री को बर्दाश्त नही होता, दांयी डिम्ब-ग्रंथियों का दर्द उठकर जांघ तक फैल जाता है. इस तरह के लक्षण होने पर उपचार करने के लिए ब्रायोनिया औषधि का सेवन करना लाभदायक होता है.

4.कोलोसिन्थ

अगर रोगी स्त्री को ब्रायोनिया औषधि से लाभ न मिले तो उसके लिए कोलोसिन्थ औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होगा. रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में दर्द होने के साथ बेचैनी सी होना, दर्द के मारे उसे अपने दर्द वाले स्थान को हाथों से दबाना पड़ता है जिससे उसे आराम मिलता है. इस तरह के लक्षणों में कोलोसिन्थ औषधि की 6 या 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए.

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5.एपिस

अगर रोगी स्त्री की दांयी तरफ की डिम्ब-ग्रंथि में सूजन हो तथा जिसे जरा सा छूते ही उसे दर्द होने लगता हो, डिम्ब-ग्रंथि में जलन होती है, डंक लगने जैसा दर्द होता हो तो इन लक्षणों के आधार पर रोगी स्त्री को एपिस औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन कराना लाभकारी होगा.

6.लैकेसिस

अगर रोगी स्त्री की बांई तरफ की डिम्ब-ग्रंथि में सूजन हो तो उसे लैकेसिस औषधि देना काफी फायदेमन्द साबित होता है. इस औषधि का बांई तरफ की डिम्ब-ग्रंथियों पर बहुत ही अच्छा असर होता है. अगर रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथि में मवाद पड़ गई हो तो उस समय लैकेसिस औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करना चाहिए.

7.हिपर-सल्फ

अगर रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में पीब पड़ गई हो तो उसे हिपर-सल्फ की 30 शक्ति का प्रयोग करना उचित होता है.

8.प्लैटिनम

रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में मवाद पड़ जाने पर अगर लैकेसिस या हिपर-सल्फ औषधि से खास लाभ न हो तो उसे प्लैटिनम औषधि का सेवन कराना चाहिए. डिम्ब-ग्रंथि का दर्द धीरे-धीरे करके तेज होता है और इसी तरह धीरे-धीरे करके कम भी हो जाता है. रोगी स्त्री को अपनी दोनों टांगे फैलाकर सोना पड़ता है, डिम्ब-ग्रंथियों में जलन होती है. इन लक्षणों में रोगी स्त्री को प्लैटिनम औषधि की 6x मात्रा या 30 शक्ति देने से लाभ मिलता है.

9.आर्सेनिक

अगर रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में सूजन होने पर सिंकाई करने से आराम मिलता है तो उस समय आर्सेनिक औषधि देना लाभकारी रहता है. रोगी स्त्री को बहुत तेज प्यास लगती रहती है जिसके कारण से उसे थोड़ा-थोड़ा सा पानी बार-बार पीना पड़ता है. इस प्रकार के लक्षणों में रोगी स्त्री को आर्सेनिक औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराना लाभदायक होता है.

10.ऐकोनाइट

यदि किसी स्त्री को सर्दी लग जाने के कारण से मासिकधर्म बन्द होकर डिम्ब-ग्रंथियों में सूजन के साथ जलन हो रही हो और स्त्री में पेशाब से सम्बंधिक परेशानियां दिखाई पड़ रही हो तो ऐसी स्त्री के इस रोग को ठीक करने के लिए एकोनाइट औषधि की 3x मात्रा का प्रयोग करना चाहिए.

11.आरम-म्यूर-नेट

यदि स्त्री के बांयी ओर का डिम्बकोष कड़ा हो गया हो तो उपचार के लिए आरम-म्यूर-नेट औषधि की 3 शक्ति का उपयोग करना चाहिए. रोगी स्त्री के इस प्रकार के लक्षणों को दूर करने के लिए कैल्के-फास औषधि की 6x मात्रा, सिमिसिफ्यूगा औषधि की 30 शक्ति या लिलियम औषधि की 6 शक्ति का भी प्रयोग किया जा सकता है.

12.यदि प्रमेह रोग होने के साथ ही डिम्बकोष-प्रदाह हो गया हो तो ऐसी अवस्था में उपचार करने के लिए पल्स औषधि की 3 या 30 शक्ति, मर्क की 6 शक्ति, आरम-मेट की 3 या 200 शक्ति या थूजा औषधि की 30 या 200 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी होता है.

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उपचार upchar

1.इस रोग से पीड़ित स्त्री को विश्राम और हल्का पथ्य देना उचित होता है.

2.संभोग क्रिया भी नहीं करना चाहिए.

3.डिम्बकोष पर सूखा सिंकाई करने पर दर्द कम होता है.

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