डिम्ब ग्रंथियों की नसों में दर्द होना

डिम्ब ग्रंथियों की नसों में दर्द होना dimb granthiyo ki naso me dard hona dard ka ilaj hindi me

डिम्ब ग्रंथियों की नसों में दर्द हो तो इसका इलाज तुरंत ही कर लेना चाहिए. यह एक प्रकार का स्नायविक दर्द होता है. इस रोग के होने पर दर्द डिम्ब-ग्रंथियों में एकाएक पैदा होकर इसके चारों ओर फैल जाता है.

जब यह रोग हो जाता है तो रोगी में दर्द के अलावा और भी कई प्रकार के लक्षण नज़र आते हैं- उल्टी आना, कलेजा धड़कना, पेशाब कम आना तथा पेट फूलना आदि. डिम्बकोष की ग्रंथियों की स्नायु-शूल से पीड़ित स्त्री को संभोग नहीं करना चाहिए और मानसिक उत्तेजना से बचना चाहिए.

डिम्ब-ग्रंथियों के स्नायु-शूल को ठीक करने के लिए मेडिसिन से उपचार dimb granthiyo ke snayu shool ko thik karne ke liye medicine se upcar

1.ऐक्टिया रेसिमोसा

ऐक्टिया रेसिमोसा औषधि स्त्रियों के गर्भाशय तथा डिम्ब-ग्रंथियों पर बहुत ही असरदार क्रिया करती है. स्त्रियों की डिम्ब-ग्रंथियों में दर्द होने पर इस औषधि को लेने से लाभ मिलता है. रोगी स्त्री के कभी एक नितंब में और कभी दूसरे नितंब में दर्द आता-जाता रहता है. इस प्रकार के लक्षणों में रोगी स्त्री को ऐक्टिया-रेसिमोसा औषधि की 3 शक्ति हर 2 घंटे के बाद देने से लाभ मिलता है.

2.नेजा

रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में बहुत तेजी से दर्द उठने पर तुरंत ही उसे नेजा औषधि की 6 शक्ति का सेवन कराने से आराम मिलता है.

3.जिंकम-वैलेरियाना

इस रोग से पीड़ित स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में जब दर्द से कुछ आराम मिल जाए तो इस अवस्था में इस रोग का उपचार करने के लिए जिंकम-वैलेरियाना औषधि की 3x मात्रा विचूर्ण का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है.

4.कोलोसिन्थ

अगर डिम्ब-ग्रंथियों में दर्द होने के साथ ही रोगी स्त्री अपनी टांगों को पेट के साथ सटाकर लेटती है तो उसे कुछ आराम मिलता हो तो उस समय कोलोसिन्थ औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराना लाभदायक होता है.

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5.एपिस

रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में दर्द डंक लगने के समान हो, प्यास बिल्कुल ना लगना, गर्मी से परेशान हो जाना आदि लक्षण हो तो इस आधार पर एपिस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना उचित रहता है.

6.हैमैमेलिस

डिम्ब-ग्रंथियों के स्नायु-शूल में हैमैमेलिस औषधि बहुत ही असरकारक माना जाता है. रोगी स्त्री के एक मासिकधर्म समाप्त होने और दूसरा मासिकधर्म आने से पहले के बीच के समय में खून आने लगता है, मासिकस्राव के समय खून ज्यादा मात्रा में आता है आदि लक्षणों के आधार पर हैमैमेलिस औषधि की 6 शक्ति का सेवन अच्छा रहता है. बवासीर रोग या शरीर में से कहीं भी काले रंग का खून आने पर इस औषधि का प्रयोग किया जाता सकता है.

7.लिलियम-टिग्रिनम

रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में होने वाला दर्द जो बांयी तरफ से उठकर नीचे जांघों तक चला जाता है, गर्भाशय में नीचे की तरह भारीपन सा महसूस होता है जिसके कारण रोगी स्त्री को उसे हाथों से दबाना पड़ता है. रोगी स्त्री की यौन-उत्तेजना बढ़ जाती है जिसको काबू करना उसे बहुत मुश्किल हो जाता है. इन लक्षणों में अगर रोगी स्त्री को लिलियम-टिग्रिनम औषधि की 30 शक्ति हर 2 घंटे के बाद दी जाए तो उसे आराम मिलता है.

8.पल्सेटिला

रोगी स्त्री की डिम्ब-ग्रंथियों में दर्द होने के साथ ही मासिकधर्म में स्राव बहुत ही कम मात्रा में आना या बिल्कुल ही ना आना जैसे लक्षणों में पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का सेवन करने से लाभ मिलता है.

9.लैकेसिस

रोगी स्त्री की बांयी तरफ की डिम्ब-ग्रंथि में दर्द होना और गर्भाशय में बच्चे को जन्म देते समय जैसा दर्द होने के साथ उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कि गर्भाशय का मुंह खुल गया हो. इस तरह के लक्षणों में लैकेसिस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग उचित रहता है.

10.हिपर-सल्फ

रोगी स्त्री के डिम्ब-ग्रंथि वाले भाग में अगर जरा सा हाथ भी लग जाता है तो वो उसे बर्दाश्त नही कर पाती और दर्द से कराह उठती है. इस प्रकार के दर्द वाले लक्षण में उसे हिपर-सल्फ औषधि की 30 शक्ति देनी चाहिए.

11.मैग्नेशिया-फॉस

मैग्नेशिया औषधि डिम्ब-ग्रंथियों के हर प्रकार के दर्द में बहुत ही असरकारक साबित होती है. बहुत तेज दर्द में इस औषधि की 3x मात्रा को हर 20-25 मिनट में रोगी स्त्री को देते रहना चाहिए.

12.ऐट्रोपिया

यदि रोगी स्त्री के डिम्बकोष की ग्रंथियों में तेज दर्द हो रहा हो तो इस अवस्था में उपचार करने के लिए ऐट्रोपिया औषधि की 3x मात्रा विचूर्ण का उपयोग करना अधिक लाभदायक होता है.

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13.स्टैफिसेग्रिया

डिम्बकोष की ग्रंथियों की स्नायु में दर्द होने का कारण यदि मानसिक उत्तेजना हो तो उपचार करने के लिए इसकी 6 शक्ति का उपयोग करना चाहिए. डिम्बकोष की स्नायुशूल को ठीक करने के लिए मैग-फास, आस्टिलेगो, कोनायम, सिमिसि आदि औषधि का प्रयोग लक्षणों के आधार पर कर सकते हैं.

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