नील रोग का इलाज हिंदी में

नील रोग का इलाज हिंदी में Treatment of Neel Disease in Hindi, neel rog ka ilaj hindi me

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hindi upchar, दोस्तों नील रोग एक ऐसा रोग होता है जो की खून से सम्बंधित होता है. नील रोग का होना तब पाया जाता है जब आपके शरीर में आक्सीजन की मात्रा कम होती चली जाती है. जिस कारण से आपके शरीर को अत्यधिक नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए इस रोग का इलाज जल्द से जल्द करा लेना चाहिए.

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1. केद्रीय सायनोसिस central saynosis

नाखून, होंठ और जीभ का नीला हो जाना जो खून में आक्सीजन की कमी के कारण होता है.

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केद्रीय सायनोसिस के कारण Causes of Central Cyanosis

इस प्रकार का सायनोसिस रोग फेफड़ों के काम ना कर पाने के कारण, सांस में रुकावट आना, दिल के रोगों के कारण, टी.बी. रोग के कारण, पुराना फुफ्फसु का रोग, सौत्रिक तंतु पैदा हो जाना, खून में हेमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाना आदि के कारण से होता है.

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2. पेरीफेरल सायोनोसिस peripheral saynosis

रोगी स्त्री के नाखून और होंठ नीले पड़ जाते हैं लेकिन उसकी जीभ गुलाबी ही रहती है.

पेरीफेरल सायोनोसिस के कारण Reasons for Peripheral Psoronosis

इस तरह का सायनोसिस किसी तरह का सदमा लग जाने के कारण, बहुत ज्यादा ठंड लगने की वजह से, दिल के रोग होने के कारण हो जाता है. ये रोग शरीर में खून का बहाव धीरे होने के कारण से होता है.

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3. मिश्रित misrit rog

इस अवस्था में केन्द्रीय और पेरीफेरल दोनों ही तरह के सायनोसिस के लक्षण शामिल होते हैं.

मिश्रित रोग के कारण Due to Mixed Disease

इस तरह का सायनोसिस दिल का दौरा पड़ने के कारण, दिल के द्विकपाटी रोग और कपाट रोग के कारण होता है.

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नील रोग लक्षण हिंदी Blue disease syndrome

1. सायनोसिस रोग के लक्षणों में बच्चा रोते-रोते नीला पड़ जाता है.

2. रोगी के नाखून, होठ और जीभ पूरी तरह नीली हो जाती है.

3. इसके अलावा सांस का फूलना, दूसरे रोगों के कारण पैदा हुआ सायनोसिस, पैरों में ठंडक या गर्मी पहुंचना या सिर में चक्कर आना जैसे लक्षण भी प्रकट हो जाते हैं.

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नील रोग की पहचान Identification of blue disease

1. अगर सायनोसिस रोगी का शरीर या दूसरे अंग नीले पड़ जाते हैं तो उसे तुरंत ही चिकित्सक से मिलना चाहिए.

2. अगर रोगी के घर में या आस-पास ऑक्सीजन यंत्र हो तो उसे तुरंत ही रोगी को लगा देना चाहिए नहीं तो रोगी को खुली हवा में ले जाना चाहिए.

3. रोगी की त्वचा को गर्म रखने की कोशिश करनी चाहिए या उसे गर्मी देनी चाहिए. इससे शरीर का रक्त-संचार तेज हो जाता है.

4. अगर रोग के कारण बच्चा रोता रहता है और चुप नहीं होता तो उसे खुली हवा में ले जाना चाहिए. उसको ज्यादा टाईट कपड़े नहीं पहनाने चाहिए तथा गले के पास के कपड़ों को ढीला कर देना चाहिए.

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तो दोस्तों इस तरह से आप अपने शरीर में बढ़ रहे नील रोग को आसानी से पहचान सकते है, साथ ही इसका इलाज भी कर सकते है. लेकिन इस जानकारी को उपयोग करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलहा जरूर ले. धन्यवाद्

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