बताना भी नहीं आता जताना भी नहीं आता

बताना भी नहीं आता जताना भी नहीं आता रियल लाइफ स्टोरी

आज मैं आपको अपनी रियल लाइफ स्टोरी आपके सामने रखने जा रहा हु.मेरा नाम सुधीर पाण्ड्य है और मैं कानपुर नगर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हु. ये मेरी एक छोटी से लव स्टोरी है , जो सायद आपको पसंद आएगी. प्यार करने और जाहिर करने में बहुत फर्क होता है. प्यार करने के मामले में लव स्कूल का प्रिंसपल हूं मैं, पर उसे जाहिर करने के नाम पर तो जैसे पिछले कई साल से मैं नरर्सी का ही स्टूडेंट हूं. जिसे कोई टीचर सिर्फ इसलिए नहीं पास कर रहा क्योंकि मैं आज तक प्यार जाहिर करने की ए बी सी डी भी नहीं सीख पाया.

करता भी क्या प्यार करना तो मेरे हाथ में था पर जाहिर करने के लिए तो जैसे मुझे कई बॉडीगार्ड की जरूरत होती थी. प्लैटफॉर्म पर ट्रेन रेंगती सी नजर आ रही थी. मैं बिना ध्यान दिए फोन पर बिजी हो गया. कुछ देर बाद आंखें खुद ब खुद एक पीली ड्रेस पर जाकर रुक गईं. घुंघराले बाल, बड़ी-बड़ी आंखें और उसपर स्लाइलिश चश्मा. इन लड़कियों को भी पता नहीं क्या मिलता है लड़कों को जलाकर. सबसे पहला ख्याल मेरे मन में यही आया था. स्टेशन पर उतरकर आगे की भी जर्नी करनी थी उसे शायद.

एक पल के उसकी नजर मेरी ऊपर पड़ी उस वक्त मैं उसे किसी इडियट की तरह निहार रहा था. किसी गल्ती को जैसे सुधारते हुए उसने दोबारा मुझे देखा. उससे बात करना चाहता था पर आवाज थी कि जैसे हलक पर अनशन करने बैठ गई थी. इसके बाद कई बार मेरी हरकतों ने उसके चेहरे पर स्माइल ला दी. हर बार अपनी जगह से उससे बात करने के लिए उठता एक राउंड लगाता और फिर किसी हारे हुए सिपाही की तरह अपनी जगह पर वापस आकर बैठ जाता.

मेरी इस हरकत पर वह बिना कुछ कहे बस हंस देती. यकीनन मेरे बात करने पर वह मुझे रेस्पॉन्स देती पर न जाने क्या था. जो मुझे उससे बात करने से रोकता रहा इजहार में जो आवाज वहां निकलनी चाहिए थी. वह यहां निकाल रहा हूं ताकि अगर वह फिर कहीं मिले तो मेरी रिहर्सल हो जाए. तो दोड़तो किसी लगी आपको ये मेरी एक छोटी सी लव स्टोरी की प्रैक्टिस की कहानी.

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