भुजाओ के दर्द में राहत पाने का इलाज

भुजाओ के दर्द में राहत पाने का इलाज Treatment of relief in pain in the side, dard ka ilaj

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दोस्तों कभी कभी हमे अपनी भुजाओ में अत्यधिक पैन महसूस होता है. जिसके कारण से हमे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसलिए हमे इसका इलाज समय रहते कर लेना चाहिए.

भुजाओं के कई भाग होते हैं और इन भागों पर निम्नलिखित बिन्दु होते हैं

  1. कांख या बगल के क्षेत्र

कांख या बगल के क्षेत्र पर दबाव देने के लिए बाएं हाथ की हथेली को सीधा, ऊपर की ओर कर के भुजा को बगल की ओर सीधा फैलाएं, फिर दाहिनी हाथ की तर्जनी, मध्यम तथा अनामिका उंगलियों को कांख पर रखें और अंगूठे को डेल्टोपेक्टरल ग्रुव पर. फिर इसके बाद इन बिन्दुओं पर उंगलियों के उभरे भाग से दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर कम से कम पांच सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए और इलाज की इस क्रिया को तीन बार दोहराना चाहिए.

जब इन बिन्दुओं पर दबाव देते है तो दबाव की दिशा ऊपरी स्कंधफलक (कंधे की ओर) क्षेत्र की ओर रहनी चाहिए. ठीक इसी प्रकार से अपने दूसरे हाथ की भुजा के बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक लगतार दबाव देने से कई प्रकार के रोग जो इन बिन्दुओं से सम्बन्धित होते है जल्दी ही ठीक हो जाते हैं.

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  1. मध्य भुजा क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार मध्य भुजा क्षेत्र पर दबाव देने के लिए सबसे पहले यह जानने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र की बिन्दु होती कहां हैं. इस क्षेत्र से सम्बन्धित बिन्दु कांख से अग्रबाहू कोटर तक एक सीधी रेखा के रूप में स्थित होती हैं. इस भाग पर 6 बिन्दु होती हैं. इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने दाहिने हाथ के अंगूठे की नोक को कांख पर रखना चाहिए तथा इसके बाद शेष उंगलियों से भुजा के चारों तरफ लपेट लेना चाहिए.

अंगूठे से 6 बिन्दुओं में से प्रत्येक बिन्दु पर लगभग तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. ठीक इसी प्रकार से अपने दूसरे हाथ की भुजा के बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर दबाव देने की क्रिया तीन बार दोहरानी चाहिए. इन बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक लगातार दबाव देने से कई प्रकार के रोग जो इन बिन्दुओं से सम्बन्धित होते हैं वे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं.

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  1. अग्रबाहू कोटर

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अग्रबाहू कोटर क्षेत्र पर दबाव देने के लिए, इस भाग से सम्बन्धित बिन्दु कहां होती है यह जानना आवश्यक है. अग्रबाहू कोटर की बिन्दु हाथ की भुजाओं के क्षेत्र के तीन बिन्दु आंतरिक भाग से बाहरी भाग की ओर एक पंक्ति में स्थित रहती हैं. इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए अपने दाहिने हाथ की चारों उंगलियों को भुजा पर रख कर ऊपर की ओर नोक वाले दाहिने अंगूठे से सभी बिन्दु पर तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए.

फिर इसके बाद इस क्रिया को तीन बार दोहराना चाहिए. ठीक इसी प्रकार से अपने दूसरे हाथ की भुजा के बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर दबाव देने की क्रिया तीन बार दोहरानी चाहिए. इन बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक लगातार दबाव देने से कई प्रकार के रोग जो इन बिन्दुओं से सम्बन्धित होते है वे जल्दी ही ठीक हो जाते है.

  1. मध्य अग्रबाहू क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार मध्य अग्रबाहू के क्षेत्र पर दबाव देने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि इस भाग से सम्बन्धित बिन्दु कहां स्थित है. इस भाग में रोगों को ठीक करने के लिए 24 बिन्दु होते हैं और ये बिन्दु प्रकोष्ठिका से बहि:प्रकोष्ठिका तक तीन-तीन बिन्दुओं की आठ उर्ध्वाकार पंक्तियों में स्थित होती हैं. ये आठ उर्ध्वाकार पंक्तियों में पंक्तियां अग्रबाहू कोटर पर स्थित तीन बिन्दुओं के ठीक नीचे स्थित रहती हैं.

इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से प्रत्येक बिन्दु पर लगभग तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. इस प्रकार का दबाव भुजा पर केवल एक बार ही करना चाहिए. ठीक इसी प्रकार से अपने दूसरें हाथ की भुजा के बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक लगतार दबाव देने से कई प्रकार के रोग जो इन बिन्दुओं से सम्बन्धित होते हैं जल्दी ही ठीक हो जाते हैं.

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  1. डेल्टोपेक्टोरल ग्रूव

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार डेल्टोपेक्टोरल ग्रूव के क्षेत्र के बिन्दु पर दबाव देने के लिए यह जानना जरूरी है कि ये बिन्दु कहां स्थित होती हैं. इस क्षेत्र से सम्बन्धित बिन्दु भुजा के ऊपर कंधे के आस-पास होती है इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से प्रत्येक बिन्दु पर दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर लगभग तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर दबाव देते समय हाथ की सारी उंगलियां भुजा पर रहती हैं. इस प्रकार का दबाव इन बिन्दुओं पर तीन बार दोहराना चाहिए. इसके बाद ठीक दूसरें हाथ के भुजाओं पर भी इसी प्रकार से दबाव देना चाहिए. इस प्रकार से कुछ दिनों तक लगातार दबाव देने से रोगी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है.

  1. पार्श्विक भुजा क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार पार्श्विक भुजा के क्षेत्र कें बिन्दु कंधे की त्रिकोणिका पेशी के मध्य भाग के साथ अंसूकट से कोहनी की जड़ तक रहता है. इस भुजा की बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए सबसे पहले भुजा को इस प्रकार घुमाएं कि हथेली अन्दर की ओर रहे फिर अंगूठे को सहारे के लिए भुजा के अन्दर को मोड़ना चाहिए. फिर इस बिन्दु पर तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए तथा इन बिन्दुओं पर दबाव देने के लिए अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यम तथा अनामिका उंगलियों का प्रयोग करना चाहिए. इसके बाद इस इलाज को तीन बार दोहराना चाहिए. फिर इसके बाद अपने दूसरे हाथ की भुजाओं पर भी इसी प्रकार से दबाव देना चाहिए. इस प्रकार से कुछ दिनों तक लगतार इलाज करने से रोगी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है.

  1. पार्श्विक अग्रबाहू क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार पार्श्विक अग्रबाहू (हाथ के कोहनी से कलाई के बीच का भाग) क्षेत्र के पास यदि आप अपने हाथ की चारों उंगलियों को मिला कर मोडेगें तो कोहनी के पास आप प्रसारक पेशियों में गति महसूस करेंगे. यह वह स्थान होता है जहां पर पार्श्विक अग्रबाहू क्षेत्र का पहला बिन्दु स्थित होता है. वैसे पार्श्विक अग्रबाहू क्षेत्र के आठ बिन्दु वहां से पार्श्विक अग्रबाहू क्षेत्र की कलाई तक स्थित रहते हैं. इन बिन्दुओं से इलाज के लिए आपको अपनी कोहनी मोड़कर अग्रबाहू (हाथ के कोहनी से कलाई के बीच का भाग) को छाती के सम्मुख लाना होगा.

इसके बाद कोहनी की ओर केन्द्रित अपने दाहिने से पहले बिन्दु पर दबाव डालें. इस हाथ की शेष उंगलियां सहारे के लिए भुजा से चिपकी रहनी चाहिए. इन बिन्दुओं पर तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. इस इलाज को तीन बार दोहराना चाहिए. ठीक इसी प्रकार से रोगी के दूसरे हाथ पर भी दबाव देना चाहिए. इस प्रकार से रोगी व्यक्ति प्रतिदिन यह इलाज को अपनाता है तो उसका रोग कुछ ही दिनों के अन्दर ठीक हो जाता है.

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  1. हाथ का पृष्ठीय क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार हाथ के पृष्ठ भाग पर बिन्दु हडि्डयों के मध्य में तीन-तीन बिन्दुओं की चार पंक्तियों में कलाई से उंगलियों के मूल (जड़) तक स्थित होते है. फिर इसके बाद कलाई को मोड़े तथा दाहिने अंगूठे से अंगूठे की दिशा से प्रारंभ करके इनमें से प्रत्येक बिन्दु पर तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. दबाव देते समय हाथ की चारों उंगलियां सहारे के लिए हथेली से लिपटी रहती हैं. एक बार दबाव देने के बाद दूसरे हाथ की भुजा पर भी ठीक इसी प्रकार से दबाव देना चाहिए. इस प्रकार से प्रतिदिन इलाज करने से रोगी व्यक्ति का रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है.

  1. आंगुलिक क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अंगूठे के मांस से दूर स्थित पर्व पर पंक्ति के रूप में तीन बिन्दु स्थित होते हैं. दाहिने हाथ के अंगूठे व तर्जनी उंगली से पृष्ठ व हथेली के प्रत्येक बिन्दु पर बारी-बारी से दबाव देना चहिए. फिर दूर वाले पर्व भाग पर दबाव देना चाहिए और फिर इस अंगुली को खींचना चाहिए. इसके बाद सभी बिन्दुओं पर जो दाएं तथा बाएं भाग पर होते हैं पर दबाव देना चाहिए. जब अंगूठे के बिन्दुओं पर दबाव दे देते हैं तो उसके बाद शेष उंगलियों के चारों बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इन बिन्दुओं पर दबाव कम से कम तीन सेकेण्ड के लिए देना चाहिए. इस प्रकार का इलाज फिर दूसरे हाथ की उंगलियों पर भी करना चाहिए. इस प्रकार का इलाज कुछ दिनों तक करने से रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है.

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  1. हथेली क्षेत्र

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार हाथ की हथेली के मध्य रेखा पर तीन दबाव बिन्दु होते हैं. पहला बिन्दु हथेली के निचले भाग पर होता है तथा दूसरा बिन्दु हथेली के मध्य भाग में होता है और तीसरा मध्यम उंगली की जड़ के पास होता है. इन बिन्दुओं पर सहारा देने के लिए हाथ की शेष चारों उंगलियां हाथ के पृष्ठ भाग पर लिपटी रहती है. फिर दाहिने हाथ के अंगूठे से तीनों बिन्दुओं पर बारी-बारी से तीन सेकेण्ड के लिए दबाव देना चाहिए. फिर इस इलाज को तीन बार दोहराना चाहिए. ठीक इसी प्रकार दूसरे हाथ के बिन्दुओं पर भी दबाव देना चाहिए. इस प्रकार से कुछ दिनों तक लगतार इलाज करने से रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है.

  1. भुजा का प्रसार

आधुनिक अंगमर्दक चिकित्सा के अनुसार अपने दाएं हाथ के अंगूठे को बाईं हथेली के मध्य में रखें तथा इसके बाद हाथ की शेष उंगलियों को बाएं हाथ के पृष्ठ भाग पर लपेट लेना चाहिए. इसके बाद अपने दाएं हाथ को कंधे की ऊंचाई तक उठाएं तथा बाएं हाथ के साथ आगे की ओर फैलाएं इस तरह से भुजा को पांच सेकेण्ड के लिए फैलाना चाहिए. इसके बाद इस क्रिया को तीन बार दोहराना चाहिए. इस प्रकार से अगर रोगी प्रतिदिन इलाज करता है तो उसका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है.

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