महिला शरीर की सम्पूर्ण जानकारी

महिला शरीर की सम्पूर्ण जानकारी Female body information hindi, mahila sherir ki sampurn janakri

Health tips in hindi

महिलाओ का शरीर पुरुषो के शरीर से काफी हद तक अलग होता है. उनके बॉडी पार्ट्स के अलावा बहुत कुछ अलग होता है. जैसे की पुरुषो में शुक्राणु पाए जाते है, तो वही महिलाओ में अंडाणु पाए जाते है. काम दोनों का एक सा ही होता है, लेकिन अलग है तो सिर्फ नाम. वैसे और बहुत कुछ अलग होता है. जिसकी जानकारी हम आपको देने जा रहे है. सभी महिलाओ के लिए यह आवश्यक होता है कि उन्हे अपने शरीर के सभी अंगों और उनके कार्यों के बारे में जानकारी हो.

यहां पर केवल महिला के जननांगों के बारे में जानकारी दी जा रही है. कुछ स्त्रियां अपने जनन अंग को शरीर का सबसे गन्दा हिस्सा समझती हैं परन्तु महिलाओ का यह विचार गलत है. महिलाओ का यह अंग प्रत्येक महीने स्वयं ही साफ होता रहता है. यदि महिलाओ के जनन अंग की तुलना मुंह से की जाए तो यह पता चलता है कि महिलाओ का यह भाग मुंह से भी कहीं अधिक साफ रहता है.

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महिला जननांग की बनावट कैसी होती है Mahila jannang ki banavat kesi hoti hai

महिला के जननांग में सबसे पहले बाहर की तरफ बाल होते हैं जिन्हे प्यूबिक बाल कहा जाता है. ये बाल महिला जननांग को चारों ओर से घेरे रहते हैं. ऊपर की तरफ एक अंग जो उल्टे वी के आकार का होता है उसे क्लाईटोरिस कहते हैं. यह भाग काफी संवेदनशील होता है. क्लाइटोरिस के नीचे एक छोटा सा छेद होता है जो कि मूत्रद्वार होता है. मूत्रद्वार के नीचे एक बड़ा छिद्र होता है जिसको जनन छिद्र कहते हैं.

इसी के रास्ते प्रत्येक महीने महिलाओं को मासिक स्राव (माहवारी) होती है. इसी रास्ते के द्वारा ही बच्चे का जन्म भी होता है. इसकी दीवारे लचीली होती हैं जो बच्चे के जन्म समय फैल जाती है. इसके नीचे थोड़ी सी दूरी पर एक छिद्र होता है जिसे मलद्वार या मल निकास द्वार कहते हैं.

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महिला गर्भाशय की जानकारी Mahila garbhasy ki jankari

महिला गर्भाशय की सम्पूर्ण जानकारी इस प्रकार से है.

  1. गर्भाशय 7.5 सेमी लम्बा और 5 सेमी चौड़ा होता है तथा इसकी दीवार 2.5 सेमी मोटी होती है.
  2. इसका वजन लगभग 35 ग्राम तथा इसकी आकृति नाशपाती के आकार के जैसी होती है.
  3. इसका चौड़ा भाग ऊपर फण्डस तथा पतला भाग नीचे इस्थमस कहलाता है.
  4. महिलाओं में यह मूत्र की थैली और मलाशय के बीच में होता है.
  5. गर्भाशय का झुकाव आगे की ओर होने पर उसे एन्टीवर्टेड कहते हैं अथवा पीछे की तरफ होने पर रीट्रोवर्टेड कहते हैं.
  6. गर्भाशय के झुकाव से बच्चे के जन्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.
  7. गर्भाशय के ऊपरी चौड़े भाग को बॉडी तथा निचले तंग भाग को इस्थमस कहते हैं.
  8. इस्थमस नीचे योनि में जाकर खुलता है.
  9. इस क्षेत्र को औस (Os) कहते हैं.
  10. यह क्षेत्र 1.5 से 2.5 सेमी बड़ा होता है तथा ठोस मांसपेशियों से बना होता है.
  11. गर्भावस्था के विकास के साथ गर्भाशय का आकार बढ़कर महिला की पसलियों तक पहुंच जाता है.
  12. इसके साथ ही गर्भाशय की दीवारे पतली हो जाती हैं.

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महिला गर्भाशय की मासपेशिया Mahila garbhasy ki maspesiya

महिलाओं के गर्भाशय की मांसपेशियों को प्रकृति ने एक अदभुत क्षमता प्रदान की है. इसका वितरण दो प्रकार से है-

  1. पहले वितरण को लम्बी मांसपेशियां कहते हैं.
  2. दूसरे को घुमावदार मांसपेशियां कहते हैं.

गर्भावस्था में गर्भाशय का विस्तरण तथा बच्चे के जन्म के समय लम्बी मांसपेशियां प्रमुख रूप से कार्य करती हैं. घुमावदार मांसपेशियां बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय के संकुचन तथा रक्त के बहाव को रोकने में प्रमुख भूमिका निभाती है.

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डिम्बग्रन्थि क्या होती है Dimbgranthi kya hoti hai

  1. महिलाओं में गर्भाशय के दोनों ओर डिम्बग्रन्थियां होती हैं.
  2. यह देखने में बादाम के आकार की तथा 3.5 सेमी लम्बी और 2 सेमी चौड़ी होती है.
  3. इसके ऊपर ही डिम्बनलिकाओं की तन्त्रिकाएं होती हैं जो अण्डों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.
  4. डिम्बग्रन्थियों का रंग गुलाबी होता है.
  5. उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये हल्के सफेद रंग की हो जाती है.
  6. वृद्धावस्था में यह सिकुड़कर छोटी हो जाती है. इनका प्रमुख कार्य अण्डे बनाना तथा उत्तेजित द्रव और हार्मोन्स बनाना होता है.
  7. डिम्बग्रन्थियों के मुख्य हार्मोन्स ईस्ट्रोजन और प्रोजैस्ट्रोन हैं.
  8. माहवारी स्थापित होने के पूर्व इसका कोई काम नहीं होता है परन्तु माहवारी के बाद इसमें प्रत्येक महीने डिम्ब बनते और छोडे़ जाते हैं, जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर गर्भधारण करते हैं.

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डिम्बवाहिनियां क्या होती है Dimbvahiniya kya hoti hai

  1. डिम्बवाहिनियां गर्भाशय के ऊपरी भाग के दोनों ओर से निकलती हैं तथा दोनों तरफ कूल्हे की हडि्डयों तक जाती है.
  2. इनकी लम्बाई लगभग 10 सेमी और मोटाई लगभग आधा सेमी होती है.
  3. दोनों ओर इसका आकार एक कीप की तरह का होता है. इस कीप का अन्तिम छोर लम्बी-लम्बी अंगुलियों की तरह होता है जिसको तन्त्रिकाएं कहते हैं.
  4. इनका प्रमुख कार्य डिम्बग्रन्थियों से निकले अण्डे को घेरकर उसे वाहिनियों में भेजना होता है.
  5. यह नलियां मांसपेशियों से तथा इनके अन्दर की दीवार एक झिल्ली की बनी होती है जिसको म्यूकस झिल्ली कहते हैं.
  6. डिम्बग्रन्थियों से पकडे़ अण्डे, वाहिनियों के आगे के भाग में जाकर रुकते हैं. जहां ये पुरुष के शुक्राणु के साथ मिलकर एक नये जीवन का निर्माण करते हैं.
  7. महिला जनन अंग में इस संरचना को जाइगोट कहते हैं. जाइगोट के चारों तरफ एक खास परत उत्पन्न होती है. जिसको कैरिओनिक परत कहते हैं. यह परत बच्चेदानी से संपर्क बनाती है. यदि जाइगोट बच्चेदानी में नहीं पहुंच पाता तथा नलों में ही पनपने लगता है तो इसे एक्टोपिक गर्भावस्था कहते हैं.
  8. अंडों का जीवन सिर्फ 18 घंटों का होता है जिसके बाद ये नष्ट हो जाते हैं.

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शुक्राणुओं की जानकारी Shukranuo ki jankari

  1. गर्भाशय में शुक्राणुओं की यात्रा लगभग 23 सेमी लम्बी होती है.
  2. पुरुष के शुक्राणु लगभग चार सौ करोड़ की मात्रा में महिला के गर्भाशय में प्रवेश करते हैं.
  3. पुरुषों के वीर्य में टेस्टीकुलर, प्रोस्टेटिक और सेमीनल वेसाइकिल नाम के तीन द्रव पाये जाते हैं. पुरुषों के वीर्य में पाया जाने वाला सेमीनल वेसाइकिल द्रव ही पुरुष के शुक्राणुओं को जीवित रहने में सहायता करता है.
  4. पुरुष का वीर्य लगभग 15 मिनट में पानी में परिवर्तन हो जाता है.
  5. योनि का वातावरण अम्ल (एसिडिक) के समान होता है. इस वातावरण में पुरुष के शुक्राणु जीवित नहीं रह पाते हैं और धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं.
  6. पुरुष के कुछ शुक्राणु सरवायकल कैनाल में प्रवेश कर जाते हैं. सरवायकल कैनाल का वातावरण खारा होता है. लगभग 8 से 10 प्रतिशत शुक्राणु इस वातावरण से होते हुए नलों को पार करके आखिरी किनारे पर आकर अण्डे से मिलते हैं. इस प्रक्रिया में लगभग 1500 से 2000 शुक्राणु ही नलों के किनारे तक पहुंच पाते हैं.

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पुरुष के शुक्राणु और महिला के अण्डाणु के मिलने की प्रक्रिया Purush ke shukranu aur mahila ke andanu ke milne ki parkriya

  1. पुरुष के केवल एक शुक्राणु से ही जीवन की रचना हो सकती है.
  2. पुरुष के शुक्राणुओं के तीन भाग होते हैं. 1. सिर 2. गर्दन 3. दुम. पुरुषों के शुक्राणु दुम की सहारे सेमिनल वेसाईकल द्रव में तैरते हुए महिला के अण्डाणु तक पहुंचते हैं.
  3. महिला के अण्डाणु से मिलने के बाद शुक्राणुओं का सिर महिला के अण्डे की झिल्ली को फाड़कर उसमें प्रवेश कर जाता है तथा शुक्राणुओं का गर्दन और दुम बाहर रह जाता है.
  4. जब महिला-पुरुषों के अण्डाणु और शुक्राणु आपस में मिलते हैं तो जाइगोट का जन्म होता है.
  5. महिला और पुरुष के गुणों के कण आपस में मिलने के बाद बढ़ने लगते हैं. ये बढ़ते-बढ़ते 2 से 4, 8, 16, 32 कोश बनाते हैं. यह कोश इसी तरह 266 दिन तक बढ़ने के बाद एक बच्चे का रूप ले लेते हैं.

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महिलाओ का मासिक स्राव की जानकारी Mahilao ka masik srav ki jankari

  1. महिलाओ में माहवारी पारिवारिक वातावरण, देश, मौसम आदि पर निर्भर करती है.
  2. हमारे देश में माहवारी 10 वर्ष से 12 वर्ष की उम्र में आती है तथा ठण्डे प्रदेशों में यह 13 या 14 साल की उम्र में आती है.
  3. महिलाओ की अण्डेदानी में 7-8 वर्ष की उम्र से ही उत्तेजित द्रव हार्मोन्स निकलना प्रारम्भ हो जाता हैं.
  4. इस हार्मोन्स को इस्ट्रोजन हार्मोन्स कहते हैं. इस हार्मोन्स के निकलने के कारण महिलाओ के स्तनों का आकार बढ़ने लगता है तथा धीरे-धीरे इनका विकास होता रहता है.
  5. 18 वर्ष की आयु तक लड़कियों का शरीर पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है.
  6. इसके बाद उनके शरीर में चर्बी का जमाव, शरीर का गठीला होना, बालों का विकसित होना, गर्भाशय में बच्चेदानी का पनपना और बढ़ना, जननांगों का विकास, नलियों का बढ़ना तथा प्रत्येक महीने के बाद माहवारी का आना प्रमुख पहचान बन जाती है.
  7. महिलाओ में प्रारम्भ में माहवारी अनियमित रहती है और इसके नियमित होने में कई महीने का समय लग सकता है माहवारी को नियमित करने के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है.
  8. धीरे-धीरे महिलाओ में यह स्वयं ही नियमित रूप से होने लगती है.

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महिलाओ के शरीर की हडि्डयों की बनावट कैसी होती है Mahilao ki sherir ki haddiyo ki banavat kesi hoti hai

  1. महिलाओ के शरीर की हडि्डयों की रचना प्रकृति ने विशेष रूप से की है जिससे वे बच्चे को आसानीपूर्वक जन्म दे सकती हैं.
  2. महिलाओ के कूल्हे की हड्डी पुरुष के कूल्हे की हड्डी की तुलना में अधिक स्थान रखती है.
  3. कूल्हे की हडि्डयां मुख्य रूप से तीन प्रकार की हडि्डयों से बनी होता है. पीछे की तरफ की हड्डी को सेक्रम, दोनों तरफ की हडि्डयों को इलियास तथा सामने की ओर हड्डी को प्यूबिस कहते हैं. सेक्रम के नीचे पूंछ के आकार की नुकीली हड्डी होती है. जिसको कोसिक्स कहते हैं.
  4. कूल्हे की हडि्डयों का प्रमुख कार्य कूल्हे की मांसपेशियों, अंगों तथा बच्चे को जन्म के लिए पर्याप्त जगह देना होता है.
  5. जब महिला प्रसव के समय बच्चे को जन्म देती है तो उस समय अधिक स्थान देने के लिए प्रत्येक जोड़ कुछ खुलता और ढीला होता है ताकि महिला बच्चे को आसानी से जन्म दे सके. इसको जन्ममार्ग कहते हैं.

पैरानियम क्या होता है Peraniyam kya hota hai

  1. महिलाओ के दोनों टांगों के बीच के त्रिकोण भाग को पैरानियम कहते हैं.
  2. पैरानियल बॉडी मलद्वार के आगे तथा जननद्वार के पीछे होती है. इसमें कूल्हे के निचले भाग की सभी मांसपेशियां आपस में मिलती हैं. यह प्रत्येक व्यक्तियों में अलग-अलग होती हैं.
  3. किसी में यह कमजोर और किसी में यह अधिक शक्तिशाली होती है.
  4. इस प्रकार से पैरानियम जननद्वार के पीछे तथा नीचे की दीवार को सहारा दिये रहती है.
  5. संभोग क्रिया के समय पैरानियम जननद्वार को पीछे की ओर से साधे रहती है.
  6. बढ़ती आयु के साथ-साथ यह कमजोर हो जाती है.
  7. कूल्हे के चारों ओर की मांसपेशियों के यहां एकत्र होने के कारण यहां का रोग या पस चारों ओर फैल सकता है.
  8. बच्चे के जन्म से पहले जननद्वार को यहीं से काटकर चौड़ा बनाया जाता है. ताकि बच्चे के जन्म के समय अधिक से अधिक स्थान प्राप्त हो सके तथा बच्चे के जन्म के लिए अधिक चीड़-फाड़ न करनी पडे़.
  9. प्रसव के बाद टांके इन्हीं मांसपेशियों में लगाये जाते हैं जिसको ऐपिजियोटोमी कहते हैं.

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