रक्त चाप को दूर करने का देशी इलाज

रक्त चाप को दूर करने का देशी इलाज Home remedies for removing blood pressure, blood sugar ko dur karne ka deshi ilaj

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क्या आप जानते हो की रक्त चाप एक बहुत ही बड़ी बीमारी बनती जा रही है. क्योकि ये समस्या अब आम हो गयी है, इसलिए इसका इलाज हमे समय रहते कर लेना चाहिए. हम आपको रक्त चाप से सम्बंधित सभी देशी इलाज आपको बतायेगे. हमारे गलत खान पान और रहन सहन के कारण हम लोग लो ब्लड प्रेशर के शिकार हो जाते हैं. आज हम इसी विषय पर विस्तृत चर्चा करते हैं. हमारे दिल से सारे शरीर को साफ खून की सप्लाई लगातार होती रहती है. अलग-अलग अंगों को होने वाली यह सप्लाई आर्टरीज (धमनियों) के जरिए होती है. ब्लड को प्रेशर से सारे शरीर तक पहुंचाने के लिए दिल लगातार सिकुड़ता और वापस नॉर्मल होता रहता है – एक मिनट में आमतौर पर 60 से 70 बार. जब दिल सिकुड़ता है तो खून अधिकतम दबाव के साथ आर्टरीज में जाता है. इसे सिस्टोलिक प्रेशर कहते हैं. जब दिल सिकुड़ने के बाद वापस अपनी नॉर्मल स्थिति में आता है तो खून का दबाव आर्टरीज में तो बना रहता है, पर वह न्यूनतम होता है.

इसे डायास्टोलिक प्रेशर कहते हैं. इन दोनों मापों – डायास्टोलिक और सिस्टोलिक को ब्लड प्रेशर कहते हैं. ब्लड प्रेशर दिन भर एक-सा नहीं रहता. जब हम सोकर उठते हैं तो अमूमन यह कम होता है. जब हम शारीरिक मेहनत का कुछ काम करते हैं जैसे तेज चलना, दौड़ना या टेंशन, तो यह बढ़ जाता है. बीपी मिलीमीटर्स ऑफ मरकरी (एमएमएचजी) में नापा जाता है. दरअसल निम्न रक्तचाप में रक्त का प्रवाह बहुत धीमा पड़ जाता है अर्थात् ऊ पर का रक्तचाप सामान्य से घटकर 90 अथवा 100 रह जाए तथा नीचे का रक्चाप 80 से घटकर 60 रह जाए, ऐसी स्थिति को निम्न रक्तचाप कहते है.

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दौर्बल्य, उपवास, भोजन तथा जल की कमी, अधिक शारीरिक तथा मानसिक परिश्रम, मानसिक आघात तथा अधिक रक्त बहने की दशा में यह रोग हो जाता है. निम्न रक्तचाप में नब्ज धीमी पड़ जाती है, थोड़ा सा परिश्रम करने पर रोगी थक जाता है. शरीर का दुर्बल होना, आलस्य अनुत्साह, शक्ति का घटते जाना, बातें भूल जाना, मस्तिष्क अवसाद, विस्मृति, थोड़ी सी मेहनत में ही चिड़चिड़ाहट, सिर दर्द, सिर चकराना आदि इसके लक्षण होते है.

रक्त चाप होने के कारण reason of blood sugar

  1. अधिक मानसिक चिंतन.
  2. अधिक शोक.
  3. अधिक क्रोध.
  4. आहार का असंतुलन होना.
  5. बहुत अधिक मोटापा
  6. पानी या खून की कमी.
  7. उलटियां, डेंगू-मलेरिया, हार्ट प्रॉब्लम, सदमे, इन्फेक्शन, ज्यादा मोशन आने.
  8. अचानक सदमा लगना, कोई भयावह दृश्य देखने या खबर सुनने से भी लो बीपी हो सकता है.

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रक्त चाप होने के लक्षण symptoms of blood sugar

  1. चेहरे पर फीकापन.
  2. आंखों का लाल हो जाना.
  3. नाड़ी की गति धीमी होना.
  4. प्यास लगना और तेज रफ्तार से आधी-अधूरी सांसें आना.
  5. निराशा या डिप्रेशन
  6. धुंधला दिखाई देना
  7. थकान, कमजोरी, चक्कर आना

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खान पान का रखे ख़ास ख्याल khan pan ka rakhe khas khyal

  1. पालक, मेथी, घीया, टिंडा व हरी सब्जियां लें.
  2. अनार, अमरूद, सेब, केला, चीकू व अंगूर खाएं.
  3. कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ न हो तो थोड़ा-बहुत घी, मक्खन व मलाई खाएं.
  4. केसर, दही, दूध और दूध से बने पदार्थ खाएं.
  5. सेंधा नमक का इस्तेमाल करें.
  6. सेब, गाजर या बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाएं.
  7. दिन व रात में अधिक पानी पीना चाहिए. कम से कम डेढ़ से दो लीटर पानी जरूर पीएं
  8. तुलसी, काली मिर्च, लौग और इलायची की चाय बनाकर पीएं. मात्रा सबकी एक-एक ग्राम.
  9. राई तथा सौठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर पानी में मिलाएं और पैर के तलवों पर लगाएं. प्रतिदिन सब्जी में लहसून का छौक (तड़का) लेने से निम्न रक्तचाप में तत्काल लाभ होता है.
  10. देशी गुड़ हर रोज 50 ग्राम की मात्रा में खाएं.
  11. सेब, पपीता, अंजीर, आम आदि का अधिक सेवन करें.
  12. प्रतिदिन गाजर के एक गिलास रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीएं. यह प्रयोग 30 दिनों तक करें.
  13. पुदीने की चटनी या रस में सेंधा नमक, काली मिर्च, किशमिश डालकर सेवन करें.
  14. प्रातः बासी मुंह सेब का मुरब्बा चांदी के वर्क के साथ खाएं.
  15. हींग के सेवन से रक्त जम नहीं पाता अर्थात् रक्त संचार ठीक रहता है. इसलिए निम्न रतचाप ठीक रहता है. इसलिए निम्न रतचाप में हींग का सेवन करें.
  16. भोजन के बाद आधा कप नारंगी पानी अवश्य पीएं.

रक्त चाप से बचने के उपाय blood sugar se bachne ke upay

स्मोकिंग से परहेज करें, एक्टिव रहें और ज्यादा टेंशन न करें तो लो बीपी से बचा जा सकता है.

  1. ऐलोपैथी

ऐलोपैथिक डॉक्टर लो बीपी को एक बीमारी न मानकर दूसरी बीमारियों का लक्षण या परिणाम मानते हैं, इसलिए बिना जांच वे कोई भी दवा नहीं खाने की सलाह देते हैं.

  1. होम्योपैथी

होम्योपैथी में अलग-अलग वजहों से होने वाले लो बीपी के लिए अलग-अलग दवाइयां हैं.

  1. एक्सिडेंट, ऑपरेशन या महिलाओं में डिलिवरी या पीरियड्स के दौरान ज्यादा खून बह जाने से होने वाले लो ब्लड प्रेशर के लिए चाइना-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार तीन-चार दिन तक लें.
  2. किसी भी प्रकार का सदमा लगने से होने वाले लो ब्लड प्रेशर में एकोनाइट-30 या इग्नीशिया-30 या मॉसकस-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार या कालीफॉस-6 एक्स की चार-चार गोलियां चार बार लें.
  3. अगर अक्सर लो ब्लड प्रेशर रहता हो तो आर्सेनिक एल्बम-30 या जेल्सिमियम-30 या फॉसफोरिक एसिड-30 की पांच-पांच गोलियां दिन में चार बार लें.

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