लकवा है भयानक बीमारी

लकवा है भयानक बीमारी Paranoia is terrible disease, brain stroke bhayanak bimari

Health tips in hindi

आज हम आपको लकवे के बारे मैं जानकारी देंगे. लकवा मानव शरीर को पूरी तरह से ठप कार देता है. यानी की इंसान को चलने फिरने के लायक नहीं रहने देता है. ब्रेन स्ट्रोक यानी पक्षाघात बहुत ही गंभीर बीमारी हैं. क्या आप जानते हैं. विश्व में हर 45 सेकन्ड में किसी न किसी को स्ट्रोक हो जाता है एक वर्ष में लगभग 700,000 लोग पक्षाघात से पीडित होते हैं. इतना ही नहीं विश्व में हर तीन मिनट में स्ट्रोक के एक रोगी की मौत हो जाती है और पक्षाघात, ह्रदयघात और कैंसर के बाद मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है. क्या आप जानते हैं हमारे देश में 60 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक है.

लेकिन हैरानी की बात ये है कि मेट्रो सिटीज में 50 फीसदी से अधिक लोगों को इस बात की जानकारी नहीं कि आखिर पक्षाघात है क्या. क्या आप जानते हैं पक्षाघात और इसके प्रभाव बहुत ही खतरनाक हो सकते हैं. इतना ही नहीं पक्षाघात से मौत का जोखिम भी बना रहता है. आइए जानें पक्षाघात और इसके प्रभावों के बारे में कुछ और बातें. दिमाग के किसी भाग में, खून की नस जाम होने से उस भाग को नुकसान पहुंच सकता है.

loading...

इन्हे भी जाने…. सुंदरता पाने के घरेलू उपचार

इन्हे भी जाने…. सांवली त्वचा निखारने के घरेलू नुस्खे

इन्हे भी जाने…. रोके अपनी बढ़ती हुई उम्र की रफ़्तार को

इसे पक्षाघात कहते हैं. अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुकना या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाना और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आसपास खून भर जाने से स्ट्रोक यानी पक्षाघात होता है मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम होने, अचानक रक्तस्राव होने से मस्तिष्क का दौरा पड़ जाता है यानि पक्षाघात तब लगता है जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है. जिस तरह किसी व्यक्ति के हृदय में जब रक्त आपूर्ति का आभाव होता तो कहा जाता है कि उसे दिल का दौरा पड़ गया है उसी तरह जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है. स्ट्रोक में शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है.

एक तरफ के किसी हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है. मस्तिष्क में कोई रक्तवाहिका लीक हो जाती है, तब भी स्ट्रोक हो सकता है. स्ट्रोक को सेरिब्रोवैस्कुलर दुर्घटना या सीवीए के नाम से भी जाना जाता है. पक्षाघात में आमतौर पर शरीर के एक हिस्से को लकवा अर्धांगघात मार जाता है. सिर्फ़ चेहरे, या एक बांह या एक पैर या शरीर और चेहरे के पूरे एक पहलू में लकवा मार सकता है या दुर्बलता आ सकती है.

इस्चीमिया क्या है what is Ischemia

मस्तिष्क में अपर्याप्त रक्त आपूर्ति की स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए आक्सीजन और पोषण का अभाव स्थानिकारक्तता (स्चीमिया) कहा जाता है. स्थानिकारक्तता की वजह से अंततः व्यत्तिक्रम आ जाता है, यानी मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती है और अंततः क्षतिग्रस्त मस्तिष्क में तरल युक्त गुहिका (भग्न या इंफ़ैक्ट) उनकी जगह ले लेती है. जिस व्यक्ति के मस्तिष्क के बायें गोलार्द्ध (हेमिस्फीयर) में पक्षघात लगता है उसके दायें अंग मे लकवा मारता है या अर्धांग होता है और जिस व्यक्ति के मस्तिष्क के दायें हेमिस्फ़ीयर में आघात लगता है उसका बायां अंग अर्धांग का शिकार होता है.

जब मस्तिष्क में रक्तप्रवाह बाधित होता है तो मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं तुरंत मर जाती हैं और शेष कोशिकाओं के मरने का ख़तरा पैदा हो जाता है. समय से दवाइयां देकर क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को बचाया जा सकता है. शोध कत्ताओं ने पता लगा लिया है कि आघात के शुरू होने के तीन घंटे के भीतर खून के थक्कों को घोलने वाले एजेंट टिश्यू प्लाज़्मिनोजेन एक्टिवेटर (टी-पीए) देकर इन कोशिकाओं में रक्त आपूर्ति बहाल की जा सकती है. शुरुआती हमले के बाद शुरू होने वाली क्षति की लहर को रोकने वाली बहुत-सी न्यूरोप्रोटेक्टव दवाइयों पर परीक्षण चल रहे हैं. मस्तिष्काघात को हमेशा से लाइवाज समझा जाता रहा है. इस नियतिवाद के साथ एक और धारणा जुड़ी थी कि मस्तिष्काघात सिर्फ़ उमरदराज़ लोगों को होता है इसलिए चिंता का विषय नहीं है. इन भ्रांतियों का ही नतीजा है कि मस्तिष्काघात के औसत मरीज बारह घंटे के इंतज़ार के बाद आपात चिकित्सा कक्ष में पहुंचते हैं.

इन्हे भी जाने…. नाखूनों को सुंदर बनाने के घरेलू उपचार और उपाय

इन्हे भी जाने…. पिंपल्स को हटाने के घरेलू नुश्खे

इन्हे भी जाने…. गंजेपन का इलाज या गंजेपन रोकने के उपाय

स्वास्थ्य रक्षा सेवाओं के प्रदाता आपात चिकत्सकीय स्थिति मान कर पक्षाघात का इलाज करने के बजाय सतकर्तापूर्ण प्रतीक्षा का रवैया अख़्तियार करते हैं. मस्तिष्क का आघात जैसे शब्द के इस्तेमाल के साथ पक्षाघात को एक निश्चयात्मक-विवरणात्मक नाम मिल गया है. पक्षाघात के शिकार व्यक्ति और चिकित्सकीय समुदाय दोनों की तरफ़ से आपात कार्रवाई मस्तिष्क के दौरे का उपयुक्त जवाब है. जनता का पक्षाघात को मस्तिष्क के दौरे के रूप में लेने और आपात चिकित्सा का सहारा लेने की शिक्षा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पक्षाघात के लक्षण दिखने शुरू होने के क्षण से आपात संपर्क के क्षण तक बीतने वाला हर पल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सीमित संभावना को कम करता जाता है.

लकवा होने के कारण reason of brain stroke

  1. उच्च रक्तचाप के 30 से 50 आयुवर्ग के रोगियों को स्ट्रोक का जोखिम रहता है.
  2. डॉयबिटीज के रोगियों में स्ट्रोक का जोखिम 2-3 गुना अधिक रहता है.
  3. ब्लड प्रेशर, शुगर, हृदय रोग जैसी समस्याओं के कारण.
  4. स्मोंकिग, जंक फूड, ज्यादा तैलीय भोजन का आदी होना.
  5. मस्तिष्क की किसी धमनी के संकीर्ण या अवरुद्ध होने के कारण.
  6. अधिक ठंडे मौसम में बढ़ा हुआ कॉलेस्टॉ्ल या उच्च रक्त कॉलेस्ट्रोल स्तर.
  7. पौष्टिक आहार न लेना.
  8. अधिक मोटापा.
  9. शराब, सिगरेट और तंबाकु का सेवन अधिक करना.
  10. नशीली दवाइयों का सेवन.
  11. शारीरिक सक्रियता न होना.
  12. आनुवांशिक या जन्मजात परिस्थितियां.
  13. रक्त संचार तंत्र के विकार.
  14. अचानक अज्ञात कारण से गंभीर सिरदर्द.

लकवा के प्रभाव Effects of brain Stroke

  1. पक्षाघात के कारण दीर्घकालीन विकलांगता हो सकती है. या फिर हाथ-पांव काम करना बंद कर सकते है.
  2. स्ट्रोक 20 वर्ष में सिकल सेल एनीमिया से पीडित लोगों की मौत का कारण बनता है.
  3. 15 से 59 आयुवर्ग में मृत्यु का पांचवां सबसे बड़ा कारण है.
  4. रोगी को देखने, बात करने या बातों को समझने यहां तक की खाना निगलने में भी परेशानी होने लगती हैं.
  5. यदि रोगी की पक्षाघात के दौरान ब्रेन का बहुत बड़ा भाग प्रभावित हुआ है तो श्वास संबंधी समस्याएं भी आ सकती है. या फिर बेहोशी छाने लगती है.
  6. पक्षाघात के कारण अंधता होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

लकवा के लक्षण symptoms of brain stroke

पक्षाघात के लक्षण आसानी से पहचान में आ जाते हैं: आकस्मिक स्तब्धता या कमज़ोरी ख़ासतौर से शरीर के एक हिस्से में; आकस्मिक उलझन या बोलने, किसी की कही बात समझने, एक या दोनों आंखों से देखने में आकस्मिक तकलीफ़, अचानक या सामंजस्य का अभाव, बिना किसी ज्ञात कारण के अचानक सरदर्द या चक्कर आना. चक्कर आने या सरदर्द होने के दूसरे कारणों की पड़ताल के क्रम में भी पक्षाघात का निदान हो सकता. ये लक्षण संकेत देते हैं कि पक्षाघात हो गया है और तत्काल चिकित्सकीय देखभाल की ज़रूरत है. जोख़िम के कारक उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, डाइबिटीज़ और धूम्रपान पक्षाघात का जोख़िम पैदा करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं. इनके अलावा अल्कोहल का अत्यधिक सेवन, उच्च रक्त कॉलेस्टेराल स्तर, नशीली दवाइयों का सेवन, आनुवांशिक या जन्मजात परिस्थितियां, विशेषकर रक्त परिसंचारी तंत्र के विकार.

लकवा मैं फायदा कैसे पाए brain stroke main benefits kese paye

इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि मस्तिष्क पक्षाघात या मस्तिष्क के दौरे से होने वाली क्षति की भरपाई कर लेता है. मस्तिष्क की कुछ कोशिकाएं मरी नहीं होती बल्कि क्षतिग्रस्त हुई रहती हैं और फिर से काम करना शुरू कर सकती हैं. कुछ मामलों में मस्तिष्क खुद ही अपने काम-काज का पुनर्संयोजन कर सकता है. कभी-कभार मस्तिष्क का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हिस्से का काम संभाल लेता है. पक्षाघात के पर्यवेक्षक कई बार उल्लेखनीय और अनपेक्षित स्वास्थ्य लाभ होते देखते हैं जिसकी व्याख्या नहीं की जा सकती. पक्षाघात के 10 प्रतिशत उत्तरजीवी लगभग पूरी तरह चंगे हो जाते हैं, 25 प्रतिशत कुछ मामूली विकृति के साथ चंगे हो जाते हैं, 40 प्रतिशत हल्की से लेकर गंभीर विकलांगता के शिकार हो जाते हैं और उन्हें विशेष देख-रेख की ज़रूरत पड़ती है, 10 प्रतिशत की नर्सिंगहोम में, या दीर्घकालिक देख-रेख करने वाली दूसरी सुविधाओं में रख कर उनकी देख-भाल करनी होती है, 15 प्रतिशत पक्षघात के कुछ ही समय बाद मर जाते हैं.

लकवे मैं पुनर्वास Rehabilitation in brain stroke

पुनर्वास पक्षाघात लगने के तुरंत बाद जितनी जल्दी संभव होता है, अस्पताल में ही शुरू हो जाता है. ऐसे मरीजों का पुर्नवास पक्षाघात के दो दिन बाद शुरू होता है जिनकी हालत स्थिर होती है. और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी ज़रूरत के लिहाज़ से उसे जारी रखा जाना चाहिए. पुनर्वास के विकल्पों में किसी अस्पताल की पुनर्वास इकाई, कोई सबएक्यूट केयर यूनिट, कोई पुनर्वास अस्पताल, घरेलू चिकित्सा, अस्पताल के बहिरंग विभाग में देख-रेख, किसी नर्सिंग फैसिलिटी में लंबे समय तक परिचर्या शामिल हो सकती है. पुनर्वास का मकसद क्रिया-कलापों में सुधार लाना होता है ताकि पक्षाघात का उत्तरजीवी जहां तक संभव हो स्वतंत्र रह सके. पक्षाघात के उत्तरजीवी को फिर खाना खाने, कपड़े पहनने और चलने जैसे मौलिक काम सिखाने का काम इस तरह किया जाना चाहिए ताकि व्यक्ति की मानवीय गरिमा अक्षुण्ण रहे.

इन्हे भी जाने…. थाईरायड ग्रथि से सम्बंधित रोग

इन्हे भी जाने…. शीघ्रपतन के घरेलू नुस्खे

हालांकि पक्षाघात शरीर का रोग है लेकिन वह व्यक्ति के पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है. पक्षाघात जन्य विकलांगताओं में लकवा, संज्ञानात्मक कमियां, बोलने में परेशानी, भावानात्मक परेशानियां, दैन्य दिन जीवन की समस्याएं और दर्द शामिल होता है. पक्षाघात सोचने, समझने, एकाग्रतास सीखने, फैसले लेने, और याददाश्त की समस्या पैदा कर सकता है. पक्षाघात का मरीज अपने परिवेश से अनजान हो सकता/सकती है या पक्षाघात जन्य मानसिक कमी से भी अनजान हो सकता/सकती है. पक्षाघात पीड़ितों को प्रायः किसी की कही बात समझने या अपनी बात कहने में भी परेशानी हो सकती है. भाषा संबंधी समस्याएं प्रायः मस्तिष्क के बायें टेंपोरल और पेरिएटल खंडों को पक्षाघात से लगे जरब का नतीज़ा होती हैं.

पक्षाघात भावनात्मक समस्याएं भी पैदा कर सकता है. पक्षाघात के मरीज़ों को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने में परेशानी होती है या वे ख़ास स्थितियों में अनुचित भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं. बहुत-से पक्षाघात पीड़ितों में होने वाली एक आम विकलांगता है अवसाद पक्षाघात की घटना से उत्पन्न आम उदासी से कहीं ज़्यादा पक्षाघात के मरीज दर्द सहते हैं. कष्टकर अवसन्नता या अजीब-सी अनुभूति का अनुभव कर सकते हैं. ये अनुभूतियां मस्तिष्क के संवेदी हिस्सों को पहुंची क्षति, जोड़ों की जकड़न या हाथ-पैरों की विकलांगता-जैसे बहुत-से कारकों का नतीजा हो सकती हैं.

इन्हे भी जाने…. प्रेगनेंसी मैं कोंन सी एक्सरसाइज करे

इन्हे भी जाने…. Kaan ya ears dard ka gherelu upchar

लकवे का घरेलू उपचार brain stroke ka gharelu upchar

  1. स्ट्रोक के लिये एक दवा उपलब्ध है, जिसे टी पी ए (tPA or tissue plasminogen activator) कहते हैं. लेकिन यह दवा सभी जगह उपलब्ध नहीं होता है, और यह पहले कुछ घंटे में ही काम करता है.
  2. नई इंडोवैस्कुलर तकनीक से मिनटों में ब्रेन स्ट्रोक का इलाज :
  3. इंडोवैस्कुलर एंजियोप्लास्टी की मदद से चीर-फाड़ अथवा सर्जरी के बगैर ही अब मस्तिष्क के स्ट्रोक का इलाज होने लगा है और इस तकनीक की मदद से इलाज के दो घंटे के भीतर मरीज चलने-फिरने में समर्थ हो सकता है.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!