वो कुपोषण जो भोजन से होते है

वो कुपोषण जो भोजन से होते है wo kuposhan jo bhojan se hote hai, health tips hindi

आज के युग में मानव भोजन ख़राब सा होता जा रहा है. ना जाने आज के युग में इंसान कुछ भी खा लेता है. ज्यादातर भोजन इंसान अब घर से बाहर ही करने लगा है. उसे खाने में चटपटा भोजन ही पसंद आता है. मानव शरीर तंत्रिका और कोशिका से बना होता है. हम जो भोजन करते हैं उसके पोषक तत्वों से यह तंत्रिकाएं बनती हैं. जब हमारे भोजन में ये पोषक तत्व नहीं होते तो हमारे शरीर की तंत्रिकाओं का विकास नहीं हो पाता और मनुष्य रोगी हो जाता है. रोग के कुछ कीटाणु शरीर की तंत्रिकाओं को खत्म कर देते हैं और कुछ विष के पदार्थ उत्पन्न करते हैं.

ये विष के पदार्थ खून में मिलकर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. जब ये कीटाणु शरीर में बढ़ते चले जाते हैं, तो ये नाड़ी, दिल और गुर्दों को हानि पहुंचाते हैं. इन कीटाणुओं को तभी नियंत्रित किया जा सकता है जब आपका स्वास्थ्य अच्छा हो. भोजन में होने वाले पोषक तत्व व्यक्ति को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं. हमारे शरीर के पोषण और गतिविधियों को ऊर्जा प्रदान करने के लिए अच्छा भोजन बहुत जरूरी है. बहुत कम और अधिक भोजन हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इससे हमारे शरीर के अन्दर कई रोग हो जाते हैं. अच्छे स्वास्थ्य और विकास के लिए संतुलित भोजन करें जिसमें अलग-अलग पोषक तत्व उपलब्ध हों.

जब भोजन में पोषक तत्वों (विटामिन, खनिज, और प्रोटीन,) की कमी होती है तो शरीर में पोषण की कमी से होने वाले रोग पैदा होते हैं. यदि हम भोजन अधिक मात्रा में करते हैं तो हमारे शरीर में अधिक पोषण से होने वाले रोग उत्पन्न हो जाते हैं जैसे अधिक मात्रा में विटामिन ए´ औरडी´ हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. ज्यादा मात्रा में विटामिन `डी´ लिया जाये तो शरीर के अन्दर कैल्शियम की प्रक्रिया इधर-उधर हो जाती है.

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  1. विटामिन Vitamins

विटामिन जीवित तत्वों को कहते हैं. हमारा स्वास्थ्य विटामिन के कार्यों पर निर्भर है जबकि यह शरीर के अन्दर बहुत कम मात्रा में पाया जाता है. विटामिन ऊर्जा प्राप्त करने में कोई मदद नहीं करता. यह भोजन में पाये जाने वाले प्रोटीन, वसा, कार्बोंहाइड्रेट और खनिजों का उपयोग करने में मदद करता है. शरीर के पोषण में हर विटामिन का अपना महत्व होता है. एक विटामिन की जगह दूसरा विटामिन नहीं ले सकता और इनके कार्यों में दूसरे की अनुपस्थित से रुकावट आती है. विटामिन तंतुओं के संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं. वे शरीर में हार्मोंस के निर्माण को और द्रवों के निकलने को प्रभावित करते हैं. यह बात सही है कि विटामिन समय-समय पर प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से हमारे शरीर को बचाते हैं.

यदि शरीर में विटामिन की कमी अधिक हो तो इसके लक्षण जल्द ही दिखाई दे देते हैं. हमारे रोजाना के भोजन में कार्बोहाइड्रेट और वसा की मात्रा अधिक होती है. इन दोनों को ऊर्जा में बदलने के लिए विटामिन की जरूरत होती है. विटामिन के सभी समूह `ए´ से लेकर ´के´ तक आर्गेंनिक कंपाउन्ड कहलाते हैं. जो टीम के साथ हमारे शरीर में रासायनिक परिर्वतनों को नियंत्रित करते हैं. किसी स्थित में जब शरीर के अन्दर एक या अधिक विटामिनों की कमी होती है, तो शरीर के अन्दर के अंगों की साधारण प्रक्रिया में रुकावट पैदा हो जाती है जिससे शरीर में पोषण की कमी से जुड़े रोग हो जाते हैं.

ये रोग गहरे हो जायें तो जल्द लाभ के लिए विटामिन की गोली या इंजेक्शन लेना जरूरी होता है, लेकिन अगर इन सिन्थेटिक विटामिन को लंबे समय तक लिया जाये तो अन्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं. इसलिए यह सलाह दी जाती है कि इन गोलियों का सेवन ज्यादा न करें और बड़े से बड़े रोग में भी ताजा और प्राकृतिक भोजन का संतुलित भोजन ही करें. अब आपको सबसे अधिक पाई जाने वाली पोषण की कमियों के बारे में बताया जायेगा और उन कमियों से कैसे बचें और उनसे कैसे छुटकारा पाया जाए इसके बारे में बताया जाएगा.

  1. विटामिन ‘ए’ , ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ Vitamins A,B,C,D

ये सबसे अधिक जरूरी विटामिन हैं जिनकी हमें जरूरत होती है. ए´बी´ (बी1 से बी12 तक के पूरे समूह) सी´, औरडी´ हैं. विटामिन ए´ सी´ औरडी´ पाचनक्रिया में मदद करते हैं जैसे विटामिन ए´ और सी´ स्वाभाविक रूप सें फलों में और सब्जियों में पाये जाते हैं. फलों में विटामिन सी´ अधिक मात्रा में पाया जाता है. पीले और गहरे रंग की सब्जी में विटामिनए´ की मात्रा अधिक होती है. फल को पकाने पर विटामिन सी´ की मात्रा खत्म हो जाती है इसलिये फल को कच्चा ही खाना चाहिए. ताकि विटामिनसी´ हमारे शरीर को प्राप्त हो सके.

विटामिन सी´बी12´ को पचाने के लिए आवश्यक है. सभी सब्जियां कच्ची नहीं खाई जा सकती हैं इसलिए इन्हें पकाकर भी खा सकते हैं. इनको पकाने पर कुछ नुकसान भी नहीं होता क्योंकि इन्हें पकाने पर इनमें मौजूद विटामिन ए´ खत्म भी नहीं होता है. लेकिन इसे हल्का पकाने पर विटामिनए´ की मात्रा कम हो जाती है. सब्जियो में केरोटीन नामक तत्व पाया जाता है जो हमारे शरीर में जाकर विटामिन `ए´ में बदल जाता है. इसलिए समझदारी के साथ पकाकर खाने से किसी भी विटामिन की कमी हमारे शरीर में नहीं होगी. भोजन का महत्व बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है.

इसलिये गर्भवती महिला को ऐसा भोजन करना चाहिए जिसके अन्दर इतने पोषक तत्व हो कि बच्चे और माता दोनों को भरपूर पोषण मिल सके. डिब्बा बंद खाने के पदार्थ और ठंडे पेय का सेवन नहीं करना चाहिए और शुद्ध, ताजा व प्राकृतिक भोजन ही करना चाहिए. गर्भ के समय विटामिन वाले भोजन करना बहुत जरूरी होता है. जिसके संतुलन से गर्भवती महिला स्वस्थ रहती है और सामान्य बच्चे को जन्म देती है. जिसमें पोषण की कोई कमी नहीं होती है. ये प्रोटीन युक्त भोजन, साबुत अनाज, पत्तेदार हरी सब्जी, और पीली सब्जियां, फल (खट्टे या मीठे) दूध और साधारण मात्रा में तेल और वसा हैं.

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  1. विटामिन ए Vitamins A

बचपन में विटामिन ए´ की कमी से बच्चे को कई रोग हो जाते हैं. जो माताएं पोषण युक्त भोजन नहीं करती उनके बच्चों में ये रोग पैदा हो जाते हैं. ये रोग अक्सर गरीब परिवार के बच्चों में होते हैं. विटामिनए´ की कमी से त्वचा शुष्क होने लगती है और दिन-प्रतिदिन रूखी होती रहती है. त्वचा अधिक शुष्क होने पर खाल उतरने लगती है, यहां तक कि हाथ की खाल भी उतरने लगती है. शरीर में विटामिन ए´ की कमी होने से शरीर की तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. जिससे मुंह में, सांस से जुड़े अंगों में, प्रजनन और मूत्र के रास्ते में और अधिक संवेदनशील अंग जैसे- आंखों में संक्रमण की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं. विटामिनए´ की कमी से बहुत से आंखों के रोग हो जाते हैं जैसे रात को दिखाई न देना, और मायोपिया (नजदीक दृष्टि दोष) भी. जब आंखें अधिक संक्रमित हो जाती हैं तो यह गंभीर रोग जीरोफ्थेल्मिया हो जाता है. जिसके कारण रोगी पूरी तरह अंधा हो जाता है. इसकी कमी से रोगी को शुरू में सूखापन, खुजली और सूजन जैसी परेशानियां उत्पन्न हो जाती है.

विटामिन ए के स्रोत Vitamins A ke srot

विटामिन ए ताजी हरी पत्तेदार सब्जियों में, गाजर, पपीता, लौकी, शकरकंद, पालक, खुबानी, अजवाइन, फलीदार सब्जियां, कॉड लीवर आयल, समुद्री मछली, दूध और दूध से बनी चीजें जैसे मक्खन में पाया जाता है. गाय के दूध से बनने वाले मक्खन में इसके पीले रंग के कारण विटामिन ए´ की मात्रा अधिक होती है. किसी भी व्यक्ति को रोजाना अपने खाने वाले भोजन में कम से कम 50 से 100 ग्राम तक ताजा हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए. कच्ची सब्जियों की जगह गाजर व पालक का रस ले सकते हैं. प्रतिदिन दूध का सेवन करें. व्यक्ति के रोजाना के भोजन में दूध, मक्खन, सब्जियां और फल होना जरूरी होता है. इससे व्यक्ति को विटामिनए´ पूरी मात्रा में मिल जाता है. बच्चों को घी की जगह पर मक्खन खाने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए क्योंकि जब मक्खन से घी बनाया जाता हैं तो उसमें मौजूद विटामिन ए खत्म हो जाता है.

  1. विटामिन डी Vitamins D

बच्चों के शरीर में में 6 माह से लेकर डेढ़ साल तक विटामिन डी´ की कमी रहती है. इस विटामिन की कमी से बच्चों कोरिकेटस´ (सूखा रोग) नामक रोग हो जाता है. जिससे बच्चे की हड्डी का ढांचा खराब हो जाता है. विटामिन डी´ कैल्शियम और फास्फोरस का निर्माण करने में मदद करती है. यह शरीर के ढांचे को बनाने वाले मुख्य तत्व होते हैं.रिकेटस´ नामक रोग से शरीर में हड्डियां बढ़ जाती हैं, पेट का आकार आगे बढ़ जाता है, खून में फास्फोरस और कैल्शियम का स्तर सामान्य से नीचा हो जाता है, घुटने मुड़ जाते हैं, मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और लंबी हड्डियों के सिरों के विकास में कमी हो जाती है.

विटामिन डी लक्षण Vitamins D ke lakshan

बच्चों के शरीर में विटामिन डी´ की कमी से दांतों का देर से निकलना, दांतों का ऊंचा होना जैसे साधारण लक्षण पैदा होते हैं. बड़ों में विटामिनडी´ की कमी से जोड़ों में सूजन और गठिया रोग हो जाता है. ऐसा सर्दियों में अधिक होता हैं जब सूरज की रोशनी पूरी मात्रा में नहीं मिल पाती है.

विटामिन डी के स्रोत Vitamins D

अण्डा और दूध विटामिन डी´ के अच्छे स्रोत हैं और बंदगोभी, सेब, गाजर, टमाटर, और कोड लीवर ऑयल से पूरी मात्रा में विटामिन मिल जाता है. मुख्य रूप से विटामिनडी´ सूर्य के प्रकाश से मिलता है.

  1. विटामिन ई और के Vitamins E aur K

विटामिन ई और के जैसे कुछ विटामिन शरीर में रोग पैदा नहीं करते लेकिन इनके नियमित न होने के कारण इनकी कमी हो जाती है. ये विटामिन हमारे शरीर में कम नहीं होते, क्योंकि हमारे रोजाना के भोजन में ये पूरी मात्रा में मिल जाते हैं.

विटामिन ई महिलाओं के लिए Vitamins E female ke liye

विटामिन ई का काम शरीर में खून के बहाव में मदद करना हैं. विटामिन ई´ महिलाओं की प्रजनन की शक्ति को बढ़ाता हैं. शरीर में विटामिनडी´ की मात्रा पर्याप्त होने पर बुढ़ापा देरी से आता है. इसकी कमी के कारण रोग तो नहीं होते लेकिन जब शरीर में वसा की मात्रा कम हो जाती है तो विटामिन ई´ ज्यादा मात्रा में लेने की जरूरत होती है. इसकी कमी के कारण महिलाओं में कई रोग हो सकते हैं जैसे मासिकधर्म सही समय पर न होना, गर्भ से जुड़े रोग ओर गर्भपात आदि. स्त्री व पुरुष दोनों में प्रजनन शक्ति का कम होना, हाई ब्लडप्रेशर, नाक से, गले से, गुर्दे, मूत्र और आंत से खून आना आदि विटामिनडी´ के कमी के लक्षण हैं. जब तक रोगी की स्थिति सामान्य न हो जाये तब तक उसे संतुलित भोजन करते रहना चाहिए. गेहूं के अंकुरित अनाज, सब्जियों के तेलों में, फलों में, सेब, ताजा सब्जियों में जैसे पत्ता गोभी, गाजर, अजवाइन, मटर और टमाटर आदि में मुख्य रूप विटामिन `ई´ विशेष रूप से पाया जाता है.

विटामिन के Vitamins K

शरीर में विटामिन के की कमी होने से वैसे तो कोई रोग नहीं होता. इस विटामिन की कमी होना आसामन्य है, क्योंकि यह हर प्रकार की हरी सब्जियों में पूरी मात्रा में पाया जाता है. विटामिन के´ रक्त के बहाव को रोकने के लिए जरूरी होता है और रक्त के थक्के बनने के बाद भी लाभ पहुंचाता रहता है. इसको ठीक से पचने के लिए लिए पित्त की जरूरत होती है. यदि पित्त आंतों में नहीं पहुंच नहीं पाता, तो शरीर में विटामिनके´ की कमी हो जाती है.

विटामिन `के´ के स्रोत

अंकुरित अनाज, फूलगोभी, स्ट्राबेरीज, आलू, पत्तागोभी और अनाजों का चोकर. इन सब को आप अपने रोजाना के भोजन में शामिल करें.

  1. एन्टीबायोटिक्स विनाश का कारण Antibiotics vinash ka karan

यदि जिगर और आंतों को ठीक रखने के लिए एन्टीबायोटिक्स लिए जाते हैं तो आंतों के जीवाणु खत्म हो जाते हैं. ये वे जीवाणु होते हैं जो हमारे भोजन में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वालें विटामिन के´ को इकटठा करते हैं. इस जीवाणु को खत्म हो जाने पर जल्द ही शरीर में विटामिन “के” की कमी हो जाती है. नवजात बच्चों और पीलिया से पीड़ित व्यक्तियों में विटामिनके´ की कमी पाई जाती है क्योंकि इनकी आंते पचाये हुए भोजन को पचाने में समर्थ नहीं होती. नवजात बच्चे में इसकी कमी को रोकने के लिए मां के भोजन में पूरी मात्रा में विटामिन के´ होना चाहिए. यदि यह पर्याप्त नहीं होता है तो मां को गर्भ के आखिरी दो महीनों में विटामिनके´ के इंजेक्शन दिए जाते हैं.

  1. विटामिन `सी Vitamins C

आंवला, कच्चा टमाटर और अमरूद में विटामिन सी´ अच्छी मात्रा में पाया जाता है. इसे बच्चे हमेशा खाते रहते हैं जिससे बच्चों में विटामिनसी´ की कमी नहीं होती हैं. इस विटामिन की जरूरत सर्दी के मौसम में अधिक पड़ती है क्योंकि इस मौसम में होने वाले सांस और त्वचा से जुड़े संक्रमण के प्रति यह प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करने में मदद करती है.

विटामिन `सी संक्रमण रोकता है Vitamins C sankraman roakta hai

सांस से जुड़े सभी रोग जैसे टी.बी. (तपेदिक), रिहुमेटिक फीवर, न्युमोनिया, मलेरिया और साधारण सर्दी-जुकाम से लड़ने में विटामिन सी´ काफी मदद करता है. आयरन (लोहा) को हजम करने के लिए विटामिनसी´ की आवश्यकता पड़ती है. इसीलिए किसी व्यक्ति के शरीर में खून की कमी होने पर चिकित्सा के लिए इसे दिया जाता है. यह वायरस और जीवाणु संक्रमण से बचाने में मदद करता है और हमारी धमनियों को मजबूत करता है. इस विटामिन के और दूसरे महत्वपूर्ण काम हैं जैसे जख्मों को भरना, प्रोटीन को रासायनिक में बदलने में मदद करना और हड्डियों व दांतों में कैल्शियम के साल्टस को तंत्रिकाओं में जमा करना. जब विटामिन सी´ की कमी होती है तो मानव शरीर में अलग-अलग बीमारियां पैदा हो जाती हैं जैसे पायरिया (दांतों से खून आना) आदि. विटामिनसी´ की अधिक कमी होने पर स्कर्वी नामक गंभीर बीमारी हो जाती है. इस बीमारी के लक्षणों में रोगी को धोखा हो जाता है और बडे़ से बड़े डाक्टर भ्रम में पड़ जाते हैं.

  1. विटामिन बी Vitamins B

विटामिन बी1´ गुर्दे और मांसपेशियों में इकट्ठे होते हैं. विटामिनबी1´ की अधिक कमी के कारण शरीर की नाड़ियों को नुकसान पहुंचता है, जिससे टांगों में कमजोरी आ जाती है, चक्कर आने लगते हैं, भूख नहीं लगती, मांसपेशियां खराब हो जाती हैं ऐसे गंभीर मामलों में पेरेलेसिस (लकवा) हो जाता है इसे बेरी बेरी´ रोग कहते हैं. जो पालिस हुआ चावल खाने से और अधिक मांड युक्त भोजन व मिठाइयां खाने से होता है.बी1´ की कमी से कभी कभी दिल के रोग भी हो जाते हैं. गेहूं, मटर, अंकुरित गेहूं, तिल, मेथी, हरी पत्तेदार सब्जियां, खमीर, आलू, दूध, और बिना पालिस किए हुए चावल में विटामिन बी1´ अधिक मात्रा में पाया जाता है.

विटामिन बी2´ प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट और वसा के रासायनिक बदलाव मे मदद करता है. बी2´ की कमी से त्वचा रोग, मुंह और होठों पर घाव, होठों के कोनों में सूखापन और नाक के नथूनों में सूखापन, आंखों के रोग, वजन में कमी और जीभ में अप्राकृतिक लाली आ जाती है. यह विटामिनबी2´ दूध, दही, पनीर, अण्डा, ताजी हरी सब्जी, गेहूं और बाजरा में पूरी मात्रा में पाया जाता है. विटामिन बी3´ पाचन क्रिया से जुड़ी रासायनिक प्रक्रिया में मदद करता है. इसकी अधिक कमी से गंभीर बिमारीपिलेग्रा´ हो जाती हैं. इस बीमारी के मुख्य लक्षण, डायरिया, चिकनी लाल जीभ, दिमाग में भ्रम, चक्कर, त्वचा, में दाने और चकत्ते होते हैं. सही भोजन लेने पर यह रोग पूरे तरीके से ठीक हो जाता है.

विटामिन बी3´ नीबू, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे, आलू, हरी पत्तेदार सब्जियां, सोयाबीन, सेम, की फली और मटर आदि में पाया जाता हैं. बी6´ की कमी उन नवजात बच्चों और छोटे बच्चों में पायी जाती हैं, जिनको डिब्बे का दूध और डिब्बा बंद भोजन दिया जाता है. इसकी कमी के कारण बच्चो में दौरे पड़ने लगते हैं. गाय के दूध और मां के दूध में विटामिनबी6´ पूरी मात्रा में पाया जाता है. बड़े व्यक्तियों में इसकी कमी से भूख कम लगती है, खून की कमी और नींद में कमी हो जाती है. विटामिन `बी6´ अंकुरित अनाजों सोयाबीन और दूध से बनी चीजों में अधिक पाया जाता है.

विटामिन `12´ लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और उनको परिपक्व करने में जरूरी होता है. यह नाड़ियों के तंतुओं के रख-रखाव के लिए भी जरूरी होता हैं और शरीर में अलग अलग तरह के रासायनिक बदलाव का काम करता है. इसकी कमी से शरीर में खून की कमी हो जाती हैं जिससे नाड़ी तन्त्र और रीढ़ की हड्डी को काफी नुकसान पहुंचता है.

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