शैतानी आत्मा की सच्ची कहानी

शैतानी आत्मा की सच्ची कहानी

shetani aatma ki true story

ये बात उन दिनों की है जब मैं सहारनपुर से रजवाड़ो के प्रदेश राजस्थान जा रहा था अपने ऑफिस के काम से. मुझे मॉर्निंग मैं जल्दी पहुंचना था तो इसलिए मैं रात को दस बजे ही राजस्थान के लिए निकल पड़ा और वो भी अपनी ही गाड़ी से एकेला. गुडगाँव पार करने के बाद मैंने जल्द से जल्द पहुंचने के लिए राजस्थान जाने वाला एक शार्ट कट रास्ता लेने की सोची और उस रस्ते पर चल दिया. लगभग 90 किलोमीटर चलने के बाद उस रस्ते पर लाइट नहीं जल रही थी और मुझे गाड़ी चलने मैं खासा परेशानी भी हो रही थी. मुझे कुछ साफ़ नज़र नहीं आ रहा था और रस्ता भी काफी खराब था. कुछ पांच किलोमीटर चलने के बाद मुझे सामने रस्ते पर कोई नज़र आ रहा था.

उसने मेरी गाड़ी की और रुकने का इशारा दिया और मैंने अपनी गाड़ी रोक दी. मैंने देखा की वो एक औरत थी और जिसने मुझसे खा की “क्या आप मुझे मेरे गांव मैं छोड़ सकते हो, जो की आगे नज़दीक ही है”. मैंने पूछा की आपका गांव कितनी दूर है , तो उसने खा की कुछ ही दूर है. तो मैंने उसे लिफ्ट दे दी. हम कुछ ही दूर चले होंगे की उसने मुझसे कहा की आप खा जा रहे है. तो मैंने खा की मैं राजस्थान जा रहा हु अपने किसी काम से और मैं सहारनपुर मैं रहता हु. मैंने उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मोनिका बताया. मैंने खा की आप इतनी रात को यह कर कर रही है. तो उसने बताया की मैं घर आने के लिए निकली थी और रस्ते मैं बस ख़राब हो जाने के कारण मैंने ये छोटा रास्ता पकड़ लिया लेकिन मुझे बिलकुल भी नहीं पता था की यह पर कोई भी वहां नहीं मिलता है. इसलिए मैंने जब आपको देखा तो लिफ्ट मांग ली आपसे.

हमे चलते हुए लगभग आधा घंटा हो चूका था लेकिन उसका गांव अभी भी नहीं आया था. मैंने पूछा की आपका गांव और कितनी दूर है तो उसने कहा की बस थोड़ी ही दूर है. मैं समझा की शायद नज़दीक ही होगा. लेकिन जब और एक घंटा हो गया तो मैं अब सोचने लग गया की ना तो रास्ता ख़तम हो रहा है और न ही इसका गांव ही आ रहा है. आखिर बात क्या है. की तभी मेरी गाड़ी अचानक से रुक गयी. मैंने खा आप अंदर ही बैठे मैं गाड़ी को देखता हु की क्या हुआ है. मैंने गाड़ी से उतर कर देखा और कुछ देर बाद जब मैं बोनट को निचे करता हु तो वो महिला गाड़ी मैं नहीं थी. तो मैंने उन्हें उनके नाम से आवाज़ लगानी शुरू कर दी लेकिन कोई भी नहीं बोल रहा था.

मुझे लगा की शायद कुछ गड़बड़ है और मैं गाड़ी को स्टार्ट करने लग गया. गाड़ी स्टार्ट हो चुकी थी और जैसे ही मैं कुछ दूर चला तो अचानक से एक गांव नज़र आया. वह पर खड़े एक आदमी से मैंने पूछा की क्या अपने कोई महिला देखि है क्या. उसने पूछा कोण महिला. मैंने तो नहीं देखि. उसने खा की क्या वो नील रंग की शाहडी मैं थी , तो मैंने खा की हां. तब उसने मुझे बताया की वो ज़िंदा नहीं बल्कि एक भटकती आत्मा थी. जो बहुत साल पहले मर गयी थी, अब वो वीराने मैं भटकती रहती है.

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