सपनो की कहानी मोटिवेशनल कहानी

सपनो की कहानी मोटिवेशनल कहानी

आज हम आपको दो दोस्ती के बारे मैं बतायेगे जिनका आकाश मैं उड़ने का बहुत ही पुराना सपना था और एक दिन उनका सपना सच भी हो जाता है. कैसे होता है उनका सपना सच, ये हम कहानी मैं देखेंगे. एक दिन ऐसा भी आया उनकी जिंदगी मैं जब दोनों ने मिलकर आसमान की सेर की और साथ ही कुछ और लोगो को भी आसमान मैं देखा. वो कोण थे और क्या हुआ उनके साथ आसमान मैं , अब हम आगे कहानी मैं पढ़ेंगे. मेनका और मानवी दो पक्की सहेलिया थी. वो एक दूसरे पर जान छिड़कती थी, दोनों की एक ही ख्वाहिस थी आसमान मैं उड़ना.

एक दिन मेनका और मानवी आसमान की सैर को निकले. दूर दूर तक फैला नीला आसमान. शीतल हवा और जगमग तारे. कहीं कहीं बादल, नरम नरग गद्दों की तरह. वहाँ उन्हें छोटा भालू मिला. उसका नाम छुटकू सुदेश था. छुटकू सुदेश बहुत ही पढ़ाकू था. हर समय किताब उसके हाथ में रहती और वह रात में भी धूप का चश्मा लगाए रहता. मेनका और मानवी उससे मिलकर बहुत खुश हुए. छुटकू सुदेश ने उन्हें तीन किताबें दीं. किताबों में अच्छी अच्छी कहानियाँ थीं. मेनका और मानवी भी सैर करते करते थक गए थे. वे बादलों के गद्दे पर लेटकर कहानियाँ पढ़ने लगे. बादलों के गद्दे में सितारे टँके थे.

सितारे जगमग करते थे. कहानियों की एक किताब मेनका के हाथ में थी और दूसरी छुटके भालू सुदेश के हाथ में. मानवी के पास किताब नहीं थी. वह पीछे से मेनका की किताब में झाँक रही थी. कहानी मजेदार थी, चित्र भी. बहुत देर तक वे दोनो कहानियाँ पढ़ते रहे. साथ में छुटका भालू सुदेश भी धूप का चश्मा लगाकर कहानियों की किताब पढ़ता रहा.

भला कोई धूप का चश्मा लगाकर किताब पढ़ता है. ये देख दोनों बहुत ही हसने लग गयी और जब हस्ते हस्ते उनकी आंख खुली तो उन्होंने एक घास के मैदान मैं लेटा पाया. लेकिन जब उनकी आंख खुली तो वो धरती पर ही थी. दरअसल वो दोनों ही अपने सपनो मैं आकाश मैं उड़ रही थी.

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