होली का त्यौहार कैसे मनाये

होली का त्यौहार कैसे मनाये

Holi Ka Tyohar Kese Menaye holi festival

 

आज आपको अपने त्यौहार होलिका के बारे मैं कुछ जानकारी देने जा रहा हु. होलिका या जिसे हम सब लोग होली भी कहते है हमारे भारत मैं मनने वाला एक विशेष त्यौहार माना जाता है. होलिका के कुछ अन्य नाम भी होते है जैसे की फगुवा , दुलहंडी या दोल. यह एक प्रकार का धार्मिक और सामाजिक पर्व होता है और यह बहुत प्राचीन भी है. इसका उदेश्ये सब जनो मैं धार्मिक निष्ठा और हर्सोउल्लस से मनाना होता है. तो आये आज हम अपने त्यौहार होलिका के बारे मैं कुछ चर्चा करेगे.

होलिका भारत का एक अत्यंत प्राचीन पर्व है, जो की होली के नाम से जाना जाता है. होली का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मॉस की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. यह रंगों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है और यह दो दिन तक मनाया जाता है. यह भारत और नेपाल का प्रमुख त्यौहार माना जाता है. मथुरा उत्तर प्रदेश मैं एक गांव है जो की बरसाने के नाम से जाना जाता है और यहाँ पर लठमार होली मनाई जाती है. यह गांव कृष्ण भक्तो के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कृष्ण की प्रेमिका राधे का नगर है और यह बहुत प्रसिद्ध भी है. एक अलग स्थान वृन्दावन धाम जो की मथुरा मैं ही है. यहाँ पर बाँके बिहारी मंदिर है और यह बहुत ही प्राचीन एयर पसिद्ध भी है. इसका निर्माण स्वामी हरिदास जी ने करवाया था. बिहारी मंदिर के सामने दरवाजे पर एक पर्दा लेगा दिया जाता है और यह पर्दा कुछ समय के लिए बार बार हटा दिया और बंद कर दिया जाता है ताकि लोग बाँके बिहारी जी के दर्शन कर सके.

होली को मनाने से पहले एक ऐसा स्थान ढूंडा जाता है, जहाँ पर पहले कुछ डंडे गाड़े जाते है और इसे ज्वेलित करने के लिए कुछ लकड़िया भी इकठी की जाती है ताकि अग्नि पर्ज्वेलित की जा सके. पर्व के पहला दिन होलिका दहन का दिन माना जाता है. इस दिन लोग नए नए कपडे पहनकर होलिका माता की पूजा करने उसे स्थान पर जाते है , जहाँ पर वो सब लकड़िया इकटी की गयी है. सब लोग बड़े खुसी से पूजा करते है. और बाद मैं उसी दिन होली जलाई जाती है. कुछ लोगो का यह भी मन्ना है की अगर आप किसी के सर के ऊपर से एक चन्नी को उत्तर कर होलिका मैं दाल दे तो आपके ऊपर के साडी नज़र अपने आप ही उतर जाएगी. रात भर को गाने गए जाते है और एक दूसरे के गले मिला जाता है.

होली जलाने के अगले दिन गुल्हेंडी के नाम से त्यौहार मनाया जाता है.इस दिन को लोग रंगों का त्यौहार भी कहते है. इस दिन लोग सुबह सुबह जल्दी उठते है और अपने बड़ो का आशीर्वाद लेते है ताकि उनका ये दिन हमेशा ही खुस रहे. फिर लोग अपने दोस्तों और रिस्तेदारो से मिलते है और उन्हें बधाई भी देते है. ऐसा माना जाता है की इस दिन सभी लोग अपने सब पुराने झगड़ो को भुलाकर सब प्रेम से एक दूसरे के गले मिलते है और इस त्यौहार को अलग अलग और खूबसूरत रंगों के साथ मनाते है. सब लोग अपने घरो मैं कई प्रकार के पकवान बनाते है और साथ ही मिठाई और चाट भी बनाते है और जो लोग अपने दोस्तों के घरो पर आते है उन्हें ये सब चीज़े खिलाई जाती है. यह त्यौहार दिन के दोपहर के समय मनाया जाता है. इसके बाद सब लोग स्नान कर श्याम को कपडे पहनकर एक दूसरे के घरो पर मिलने जाते है और खूबसारी खुसिया भी मनाते है.

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